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Khunti Police: खूंटी पुलिस के सामने अनोखा संकट; क्राइम कंट्रोल के साथ-साथ तेल बचाने की दोहरी जिम्मेदारी, निजी बाइक से हो रही जांच

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रांची/खूंटी: झारखंड के खूंटी जिले में पुलिस महकमे को इन दिनों एक बेहद अनोखी और कठिन प्रशासनिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। जिले की पुलिस को सड़कों पर क्राइम कंट्रोल (अपराध नियंत्रण) करने के साथ-साथ अपने सरकारी वाहनों में कम से कम ईंधन (फ्यूल) के इस्तेमाल की बड़ी जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही है। लिहाजा, तेल की खपत को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की गाड़ियां अब बहुत ज्यादा जरूरत होने या आपातकालीन स्थिति के हिसाब से ही थानों से सड़कों पर उतर रही हैं। हालांकि, राहत और गर्व की बात यह है कि संसाधनों की इस भारी कमी के बावजूद यहां के पुलिसकर्मी पूरी मुस्तैदी, जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन ग्राउंड जीरो पर कर रहे हैं।

📊 सीमित तेल में चल रहा है पूरा पुलिसिया सिस्टम: 20 हजार लीटर के कोटे के बजाय आधे ईंधन में ही निपट रहे हैं जरूरी काम

खूंटी पुलिस के बेड़े में वर्तमान में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 87 सरकारी वाहन हैं, जिनमें जिला पुलिस को हाल ही में मिलीं 14 नई आधुनिक पेट्रोलिंग गाड़ियां भी शामिल हैं। भौगोलिक स्थिति को देखते हुए जिले को हर महीने लगभग 12 हजार लीटर डीजल और 1500 लीटर पेट्रोल की सख्त जरुरत होती है। सरकारी नियमों और तय गाइडलाइंस के अनुसार एक गाड़ी को अधिकतम 225 लीटर तेल ही प्रति माह दिया जा सकता है। इस लिहाज से जिले के लिए कुल लगभग 20,200 लीटर फ्यूल की आधिकारिक स्वीकृति है, लेकिन वित्तीय और रणनीतिक कारणों से फिलहाल खूंटी पुलिस केवल 11,200 से 11,500 लीटर के बीच ही तेल का इस्तेमाल कर पा रही है। इतना ही नहीं, पुलिस विभाग अब आगामी दिनों में महज 9 से 10 हजार लीटर तेल में ही जिले के सभी जरूरी काम और गश्त निपटाने की एक विशेष माइक्रो-रणनीति पर काम कर रहा है।

🏍️ फिजूलखर्ची रोकने के लिए अपनाया गया ‘स्मार्ट मैनेजमेंट’: अब निजी बाइक और स्कूटी से केस की जांच करने जा रहे हैं अनुसंधानकर्ता

खूंटी मुख्यालय डीएसपी (DSP HQ) अखिल नीतीश कुजूर के मुताबिक, पुलिस विभाग ने ईंधन की फिजूलखर्ची को पूरी तरह रोकने और उपलब्ध सीमित संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए एक नई और प्रभावी कार्यशैली अपनाई है। अब केवल बेहद संवेदनशील और जरूरी आपराधिक मामलों में ही भारी सरकारी वाहनों का इस्तेमाल मुख्य सड़कों पर किया जा रहा है, जबकि कई थानों के अनुसंधानकर्ता (जांच अधिकारी) जरूरत पड़ने पर और संकरी गलियों में जाने के लिए अपनी निजी बाइक और स्कूटी से भी जांच कार्य और वारंट तामीली को अंजाम दे रहे हैं, ताकि सरकारी तेल की बचत की जा सके।

👩‍✈️ महिला थाना प्रभारी की सूझबूझ और जांबाजी चर्चा का विषय: सिविल ड्रेस में गुप्त जांच के दौरान हुईं सड़क हादसे का शिकार

इसी रणनीतिक बदलाव के बीच हाल ही में महिला थाना प्रभारी अपनी निजी स्कूटी से एक पेचीदा केस के अनुसंधान के लिए फील्ड में निकली थीं और तजना पुल के पास अचानक एक विपरीत दिशा से आ रहे वाहन के कारण सड़क हादसे का शिकार हो गईं। इस दुर्घटना में उनका बायां हाथ गंभीर रूप से टूट गया और शरीर के अन्य हिस्सों में भी काफी चोटें आईं। हालांकि, इस घटना पर सोशल मीडिया पर उठी चर्चाओं के बाद पुलिस के उच्च अधिकारियों ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि यह केवल तेल संकट से जुड़ा सामान्य मामला नहीं था। दरअसल, मामले का नामजद मुख्य आरोपी राजेश साहू इतना शातिर था कि वह पुलिस की नीली बत्ती वाली सरकारी गाड़ी को दूर से देखते ही मौके से फरार हो जाता था। इसलिए उसे रंगे हाथों पकड़ने के लिए महिला थाना प्रभारी ने सूझबूझ दिखाई और सिविल ड्रेस (सादे कपड़ों) में स्कूटी से गुप्त जांच और जाल बिछाने के लिए निकली थीं। यह घटना खूंटी पुलिस की सक्रिय रणनीति, ऑन-ड्यूटी समर्पण और जांबाजी को दर्शाती है।

📞 आपात स्थिति और कानून-व्यवस्था के मामलों में तुरंत पहुंचेगी पुलिस: जनता की सुरक्षा से नहीं होगा कोई समझौता

मुख्यालय डीएसपी ने जिले की जनता को आश्वस्त करते हुए स्पष्ट कहा कि तेल संकट या ईंधन के सीमित कोटे के बावजूद जिले की कानून व्यवस्था, वीआईपी सुरक्षा और आपातकालीन (Emergency/Dial 112) हालात में पुलिस की त्वरित कार्रवाई रत्ती भर भी प्रभावित नहीं होगी। दंगा, दुर्घटना या किसी भी अप्रिय घटना की सूचना मिलने पर पुलिस के भारी वाहन तुरंत मौके पर पहुंचेंगे और आम जनता की जान-माल की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। खूंटी पुलिस की यह नई कार्यशैली यह साफ दिखा रही है कि सीमित संसाधनों के बावजूद अगर सोच सकारात्मक हो, रणनीतिक प्रबंधन मजबूत हो और इच्छाशक्ति दृढ़ हो, तो हर प्रशासनिक चुनौती का सामना सफलतापूर्वक किया जा सकता है।

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