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Bhopal Petrol Crisis: भोपाल में पेट्रोल-डीजल की किल्लत पर कलेक्ट्रेट में हाई-लेवल बैठक; कंपनियों और संचालकों के दावे अलग

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भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल जिले में तेल कंपनियों द्वारा पेट्रोल पंपों को तय सीमा से अधिक पेट्रोल-डीजल की सप्लाई न दिए जाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। कंपनियों द्वारा लगाई गई इस राशनिंग (कैपिंग) के कारण पेट्रोल पंप संचालक आम उपभोक्ताओं की दैनिक मांग के अनुरूप ईंधन की निर्बाध आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। इस गंभीर समस्या के चलते शहर के कुछ प्रमुख फ्यूल स्टेशनों पर स्टॉक की भारी कमी देखी जा रही है। इस त्रिकोणीय किल्लत और विवाद का समाधान निकालने के लिए गुरुवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय में तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों, पेट्रोल पंप संचालकों और जिला खाद्य विभाग के आला अधिकारियों की एक संयुक्त आपातकालीन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पंप संचालकों के एसोसिएशन ने दोटूक कहा कि उन्हें डिपो से समय पर और पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल-डीजल नहीं मिल रहा है, जबकि इसके उलट तेल कंपनियों का दावा है कि जिले में नियमित रूप से ईंधन की आपूर्ति की जा रही है।

⛽ 5 हजार से अधिक के पेट्रोल पर अब बताना होगा ठोस कारण: ज्यादा ईंधन बेचने पर कंपनियों ने संचालकों को थमाए नोटिस

कलेक्ट्रेट की बैठक में अपनी पीड़ा रखते हुए पंप संचालकों ने कहा कि यदि वे स्थानीय ग्राहकों की वास्तविक मांग और आवश्यकता के अनुसार पेट्रोल-डीजल की खुली आपूर्ति कर देते हैं, तो तेल कंपनियां नियमों का उल्लंघन बताकर उन्हें सीधे कारण बताओ नोटिस थमा देती हैं। इस तर्क पर तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कड़े नियमों का हवाला दिया। कंपनियों ने साफ किया है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा और जमाखोरी रोकने के लिहाज से किसी भी एकल उपभोक्ता को एक बार में 5 हजार रुपये से अधिक मूल्य का पेट्रोल और 10 हजार रुपये से अधिक मूल्य का डीजल देने पर उसका ठोस कारण रजिस्टर में दर्ज करना होगा। कंपनियों के इस नए नियम से थोक और व्यावसायिक खरीदारों की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।

📊 भोपाल के 192 पंपों पर रोजाना 21 लाख लीटर ईंधन की खपत: कटारे और प्रभात पेट्रोल पंप पर स्टॉक खत्म होने के बाद जागा प्रशासन

आधिकारिक पंचांग और विभागीय जानकारी के अनुसार, भोपाल जिले में इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) सहित अन्य निजी कंपनियों के मिलाकर कुल 192 पेट्रोल पंप संचालित हो रहे हैं। इन सभी फ्यूल स्टेशनों पर सामान्य दिनों में प्रतिदिन औसतन 12 लाख लीटर डीजल और 9 लाख लीटर पेट्रोल (कुल 21 लाख लीटर ईंधन) की भारी-भरकम खपत होती है। इस विशाल मांग के बीच बीते बुधवार को शहर के बीचों-बीच स्थित प्रसिद्ध कटारे पेट्रोल पंप और रायसेन रोड पर स्थित प्रभात पेट्रोल पंप पर शाम को ही पेट्रोल-डीजल का स्टॉक पूरी तरह खत्म होने की आधिकारिक सूचना मिली थी, जिससे सड़कों पर अफरा-तफरी मच गई थी। इसी जमीनी संकट को संज्ञान में लेते हुए जिला प्रशासन और खाद्य विभाग ने सभी पक्षों को कलेक्ट्रेट तलब कर बैठक रखी, ताकि राजधानी में ईंधन की सप्लाई चेन को टूटने से बचाया जा सके।

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