Local & National News in Hindi
Logo
ब्रेकिंग
Dhar Mega Theft: धार के कवठी में बड़ी चोरी; शादी के लिए घर में रखे 60 लाख के जेवर ले उड़े बदमाश, CCT... MP Government Teacher Row: शराब के नशे में होश खो बैठा सरकारी स्कूल का गुरुजी; गलियों में घूमने के ब... Katni Road Accident: महाकाल दर्शन कर लौट रहे UP के बैंक कर्मियों की कार ट्रक में घुसी; 2 की मौत, 3 ग... Dhar Bhojshala News: हाई कोर्ट के आदेश के बाद पहला शुक्रवार; धार भोजशाला में नमाज बंद, मां वाग्देवी ... सावधान! अभी तो सिर्फ गर्मी का ट्रेलर है, असली 'फिल्म' 25 मई से होगी शुरू; 9 दिन बरसने वाली है आग! Cockroach Janta Party: क्या है 'कॉकरोच जनता पार्टी'? 30 साल के युवक ने सोशल मीडिया पर चुटकियों में ख... Indore Fraud Case: इंदौर में चिटफंड कंपनी पर दिल्ली पुलिस का बड़ा छापा; BJT ग्लोबल के दफ्तर से कई कर... India Heatwave Alert: दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में सभी भारत के; यूपी के बांदा में पारा 48 डिग्र... MP Wheat Procurement 2026: मप्र के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी; अब 28 मई तक होगी गेहूं की सरकारी खरी... सिंहस्थ-2028 में भीड़ और ट्रैफिक मैनेजमेंट संभालेगा AI; गूगल क्लाउड और मप्र सरकार के बीच बड़ा करार

Justice For Twisha: ‘8 दिन में कैसे खराब हो जाएगा शव?’; एम्स की चेतावनी पर भड़का ट्विशा शर्मा का परिवार

0 40

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का बहुचर्चित और हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामला (Justice For Twisha) लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। बीती 12 मई को हुई ट्विशा की संदिग्ध मौत के बाद से अब तक उनका अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका है। घटना के 8 दिन बीत जाने के बाद भी ट्विशा का शव एम्स (AIIMS) भोपाल की मोर्चरी (शवगृह) में सुरक्षित रखा हुआ है। इस बीच, भोपाल पुलिस ने ट्विशा के मायके पक्ष को एक आधिकारिक पत्र भेजकर तुरंत शव ले जाने और अंतिम संस्कार करने की लिखित अपील की है। पुलिस प्रशासन का तर्क है कि बहुत लंबे समय तक मोर्चरी में शव रखने के कारण उसके रासायनिक रूप से खराब होने की आशंका काफी बढ़ गई है।

📄 एम्स भोपाल के पास नहीं है अत्यधिक कम तापमान की सुविधा: 18 मई को अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को लिखा था पत्र

प्राप्त आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, बीती 18 मई को एम्स भोपाल प्रबंधन की ओर से जिला पुलिस को एक गोपनीय तकनीकी पत्र भेजा गया था। इस पत्र में डॉक्टरों ने स्पष्ट किया था कि किसी भी मानव शव को बहुत लंबे समय तक प्राकृतिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए अत्यधिक कम तापमान (Advanced Deep Freezing) की जरूरत होती है, लेकिन वर्तमान में एम्स की मोर्चरी में वैसी दीर्घकालिक विशिष्ट सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में समय बीतने के साथ शव के डीकंपोज (गलने) होने की पूरी संभावना बनी हुई है। एम्स से यह रिपोर्ट मिलने के तत्काल बाद पुलिस अधिकारियों ने मृतका के परिवार को इस गंभीर स्थिति से अवगत कराया और शव को सुपुर्दगी में लेने का आग्रह किया।

⚖️ दहेज प्रताड़ना और हत्या के आरोपों के बीच री-पोस्टमार्टम पर अड़ा परिवार: कानूनी अनुमति के लिए खटखटाया अदालत का दरवाजा

ट्विशा शर्मा के मायके पक्ष के लोग शुरुआत से ही इस पूरी घटना को आत्महत्या मानने से इनकार कर रहे हैं और इसे संदिग्ध बताते हुए गहरी साजिश का हिस्सा कह रहे हैं। परिजनों ने ट्विशा के ससुराल पक्ष के रसूखदार लोगों पर दहेज प्रताड़ना, मानसिक शोषण और हत्या जैसे बेहद गंभीर और गैर-जमानती आरोप लगाए हैं। इसी वजह से पीड़ित परिवार इस बात पर अड़ा हुआ है कि जब तक स्वतंत्र डॉक्टरों की टीम से दोबारा पोस्टमार्टम (Re-Postmortem) नहीं कराया जाता, वे शव नहीं लेंगे। दोबारा पोस्टमार्टम की कानूनी अनुमति हासिल करने के लिए परिवार ने जिला अदालत (कोर्ट) का रुख भी किया है, जहां मामले की सुनवाई जारी है।

🔥 “अगर बॉडी डीकंपोज हुई तो नष्ट हो जाएंगे सारे सबूत”: एम्स की कार्यप्रणाली पर मृतका के भाई आशीष शर्मा ने उठाए सवाल

इस पूरे घटनाक्रम और पुलिस के पत्र पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए मृतका ट्विशा के भाई आशीष शर्मा ने एम्स और प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। आशीष शर्मा का कहना है कि, “एम्स देश की इतनी बड़ी और प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्था है; अगर भोपाल एम्स में शव को हफ्तों सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं है, तो हमारी बहन के शव को तुरंत दिल्ली एम्स शिफ्ट कर दिया जाए।”

उन्होंने आगे कहा कि मेडिकल साइंस में बड़े-बड़े डीप-फ्रीजर होते हैं जिनमें हफ्तों और महीनों तक भी शवों को फॉरेंसिक साक्ष्यों के साथ सुरक्षित रखा जा सकता है। लेकिन यहाँ महज 8 दिन में ही एम्स बॉडी डीकंपोज होने की आशंका जता रहा है, जो संदेहास्पद है। उन्होंने डर जताते हुए कहा कि अगर प्रशासनिक ढील के कारण बॉडी डीकंपोज होती है, तो शरीर पर मौजूद प्रताड़ना के पूरे फॉरेंसिक सबूत हमेशा के लिए नष्ट हो जाएंगे।

👮 पुलिस नहीं दे सकती दोबारा पोस्टमार्टम की इजाजत: भोपाल पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया कानूनी अधिकार क्षेत्र

विवाद को बढ़ता देख भोपाल पुलिस कमिश्नर ने इस पूरे मामले में पुलिस की कानूनी सीमाओं को पूरी तरह से साफ कर दिया है। पुलिस कमिश्नर ने मीडिया को बताया कि दोबारा पोस्टमार्टम (Second Autopsy) कराने की अनुमति देने का वैधानिक अधिकार जिला पुलिस के पास नहीं होता है। यह संवेदनशील फैसला पूरी तरह से केवल न्यायपालिका और माननीय अदालत के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) में आता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि अगर अदालत मामले की गंभीरता को देखते हुए दोबारा पोस्टमार्टम की लिखित अनुमति प्रदान करती है, तो पुलिस प्रशासन तुरंत डॉक्टरों के पैनल की निगरानी में री-पोस्टमार्टम कराने की व्यवस्था करेगा। फिलहाल, यह पूरा मामला कानूनी प्रक्रिया के अधीन है और न्याय की मांग को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक आवाज उठाई जा रही है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Don`t copy text!