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Bhopal Twisha Sharma Case: ट्विशा शर्मा मौत मामले में गहराया रहस्य; 8 दिन बाद भी नहीं हुआ अंतिम संस्कार, एम्स में रखा है शव

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भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में जैसे-जैसे दिन बीतते जा रहे हैं, वैसे-वैसे न्याय की उम्मीद में सवाल कम होने के बजाय लगातार बढ़ते जा रहे हैं। पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की बहू ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के 8 दिन बीत जाने के बाद भी उनका अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। ट्विशा का शव अब भी एम्स (AIIMS) भोपाल की मर्चुरी में सुरक्षित रखा हुआ है। पीड़ित मायका पक्ष लगातार शव के दोबारा पोस्टमार्टम (Re-Postmortem) कराने की मांग पर अड़ा हुआ है और पूरे हाई-प्रोफाइल मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराने की मांग कर रहा है। अब इस पूरे रहस्यमयी केस में सबसे बड़ा पेच और सवाल मौत की सटीक टाइमिंग को लेकर खड़ा हो गया है।

📊 सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भारी विरोधाभास: आखिर 9:41 बजे फोन पर बात करने वाली ट्विशा की मौत कब हुई?

इस मामले में सामने आए सीसीटीवी फुटेज, परिजनों के दावे, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अस्पताल के आधिकारिक रिकॉर्ड एक-दूसरे से बिल्कुल मेल नहीं खा रहे हैं। यही वजह है कि यह कानूनी मामला सुलझने के बजाय और ज्यादा उलझता जा रहा है। ट्विशा की सास व रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि घटना वाली रात 10 बजकर 10 मिनट पर ट्विशा की मां का फोन आया था, जिसके बाद परिवार ट्विशा को लेकर रात 10:50 बजे तक एम्स पहुंच गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

लेकिन इसके विपरीत, AIIMS की पोस्टमार्टम रिपोर्ट बिल्कुल अलग कहानी बयान करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्विशा की बॉडी रात 12:05 बजे अस्पताल लाई गई थी। वहीं, पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि 12 मई की रात करीब 10:26 बजे ट्विशा घर की छत पर जिम्नास्टिक रिंग की रस्सी से फंदे पर लटकी मिली थीं। इधर ट्विशा के परिजनों का कहना है कि रात 9:41 बजे तक ट्विशा की अपनी मां से सामान्य बातचीत हुई थी। ऐसे में सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह उठ रहा है कि आखिर 9:41 बजे तक हंसकर बात करने वाली ट्विशा की मौत का असली समय क्या है?

📹 फुटेज में 8:19 बजे ही नीचे लाई गई बॉडी: साइबर एक्सपर्ट चातक वाजपेयी ने जताई सीसीटीवी से छेड़छाड़ की आशंका

पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा और विवाद अब सीसीटीवी फुटेज को लेकर हो रहा है। फुटेज के अनुसार, शाम 7:20 बजे ट्विशा अकेली घर की छत पर जाती हुई दिखाई दे रही हैं। इसके बाद रात 8:19 बजे के फुटेज में तीन लोग उनकी बॉडी को छत से नीचे लाते हुए साफ नजर आते हैं। अब सवाल यह उठता है कि अगर बॉडी रात 8:19 बजे ही नीचे ला दी गई थी, तो फिर उसे अस्पताल ले जाने और मौत की जानकारी सार्वजनिक करने के समय में इतना बड़ा (कई घंटों का) अंतर कैसे आया? वहीं, फुटेज में दिख रहे वे तीन संदेहास्पद लोग कौन हैं और उनसे पुलिस ने अब तक गहन पूछताछ की या नहीं, इस बारे में भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

इस तकनीकी पहलू पर साइबर एक्सपर्ट चातक वाजपेयी का कहना है कि, “सीसीटीवी कैमरों में समय का यह बड़ा अंतर टाइम कॉन्फिग्रेशन की तकनीकी गड़बड़ी से भी हो सकता है, लेकिन इस महत्वपूर्ण डिजिटल एविडेंस के साथ छेड़छाड़ (Tampering) की आशंका से भी कतई इनकार नहीं किया जा सकता।” उनका मानना है कि सच जानने के लिए डीवीआर (DVR) और कैमरों की तुरंत फॉरेंसिक जांच होनी जरूरी है। इस बीच, मुख्य आरोपी पति समर्थ सिंह अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर फरार चल रहा है, जिस पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित कर गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। परिजनों ने पुलिस कमिश्नर से उसकी संपत्ति कुर्क करने की गुहार लगाई है।

📄 “पासपोर्ट ऑफिस को देर से दी सूचना”: पीड़ित पिता और भाई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस प्रशासन पर लगाए लापरवाही के गंभीर आरोप

ट्विशा के पिता का सीधा आरोप है कि 15 मई को इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बावजूद भोपाल पुलिस ने पासपोर्ट कार्यालय को जानबूझकर देर से सूचना भेजी, जिससे रसूखदार आरोपी पति को देश छोड़कर भागने का पर्याप्त मौका मिल गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि मामले से जुड़े सभी डिजिटल सबूत, कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) और सीसीटीवी फुटेज की किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

ट्विशा के भाई और पिता ने एक भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि, “अब जो बेटी इस दुनिया में अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए जीवित नहीं है, उसके चरित्र पर इस तरह से कीचड़ उछाला जाना बेहद निंदनीय और गलत है।”

⚙️ नायलॉन बेल्ट के निशान और 7 लाख रुपये का विवाद: अंतिम सच के इंतजार में सवालों के घेरे में पूरा केस

पुलिस की प्राथमिक फोरेंसिक जांच में यह बात भी सामने आई है कि मृतका ट्विशा की गर्दन पर मिले चोट के निशान उसी नायलॉन बेल्ट से हूबहू मेल खाते हैं, जिसे पुलिस ने मौका-ए-वारदात से जब्त किया था। वहीं, पूर्व जज गिरिबाला सिंह के उस वित्तीय दावे पर भी मायका पक्ष ने कड़ा विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें उन्होंने ट्विशा के बैंक खाते में 7 लाख रुपये भेजने की बात कही थी। परिजनों ने साफ किया कि यह रकम ट्विशा के घरेलू खर्च के लिए नहीं, बल्कि आरोपी समर्थ सिंह के महंगे निजी सामान और उसकी पेंटिंग सामग्री मंगाने के लिए ट्रांसफर की जाती थी।

फिलहाल, इस रसूखदार घराने से जुड़े मामले में सबसे बड़ा सच सामने आना बाकी है। ट्विशा का शव न्याय की आस में मर्चुरी में पड़ा है, लेकिन मौत की असली टाइमलाइन, सीसीटीवी फुटेज का रहस्यमयी सच और उस खौफनाक रात की पूरी हकीकत अभी भी फाइलों में दफन है।

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