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India Heatwave Alert: दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में सभी भारत के; यूपी के बांदा में पारा 48 डिग्री पार, पहाड़ों में भी तपन

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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा से लेकर राजस्थान और मध्य प्रदेश तक इस बार गर्मी ने पिछले कई दशकों के नए रिकॉर्ड स्थापित कर दिए हैं। वर्तमान हालात ये हैं कि सैटेलाइट हीट मैप में भारत का आधे से ज्यादा भौगोलिक हिस्सा भीषण गर्मी के कारण गहरे लाल रंग में दिखाई दे रहा है। सबसे चौंकाने और डराने वाला आंकड़ा यह है कि दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों (World’s Hottest Cities) की वैश्विक सूची में इस समय सभी के सभी शहर भारत के ही हैं। इनमें से भी 40 सबसे गर्म शहर अकेले उत्तर प्रदेश राज्य से हैं, जिसमें बुंदेलखंड का बांदा जिला सबसे आगे है। बांदा में अधिकतम तापमान 48 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच चुका है। यानी सीधे शब्दों में कहें तो लू और तपन अपने चरम (पीक) पर है और आम लोगों के लिए दिन के उजाले में घरों से बाहर पैर निकालना पूरी तरह से जानलेवा साबित हो रहा है। सबसे ज्यादा चिंता की बात ये है कि मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक इस स्थिति से किसी भी प्रकार की राहत की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

🔥 दिल्ली-पंजाब में 7 दिन का ऑरेंज अलर्ट तो यूपी में रेड अलर्ट जारी: दिन के साथ-साथ अब रातें भी बरसाएंगी ‘लू’ की आग

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने हरियाणा, पंजाब से लेकर समूचे दिल्ली-NCR क्षेत्र तक आगामी 7 दिनों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ (Orange Alert) जारी किया है। इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश के कई संवेदनशील जिलों में भीषण ‘हीटवेव’ का ‘रेड अलर्ट’ (Red Alert) लागू है। इन सभी चिन्हित जिलों में दिन का औसत तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से काफी ऊपर बना हुआ है। मौसम विभाग ने एक और बेहद गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इस बार केवल दिन में ही कड़क धूप नहीं तपाएगी, बल्कि रात के समय भी वातावरण में हीटवेव (Warm Nights) जैसे हालात बने रहेंगे, जिससे लोगों को चौबीसों घंटे उमस और गर्म हवाओं का टॉर्चर झेलना पड़ेगा।

बांदा में तापमान का 48 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाना देश के पर्यावरणविदों के लिए एक बड़ा अलार्म (चेतावनी) है। एक हालिया शोध के मुताबिक, बांदा में ‘ग्रीन कवर’ यानी पेड़-पौधे और जंगलों का दायरा घटकर सिर्फ मात्र 3 प्रतिशत रह गया है। बुंदेलखंड के दूसरे प्रमुख जिलों जैसे चित्रकूट, झांसी और ललितपुर में भी पर्यावरण के यही बुरे हालात हैं। इसके अलावा इस पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर हो रहा अवैध खनन (Mining) भी गर्मी को कई गुना बढ़ाने की सबसे बड़ी वजह है। सूखी नदियों और खनन वाले पथरीले क्षेत्रों से सूर्य की सीधी किरणों का रिफ्लेक्शन (परावर्तन) हो रहा है, जिससे वायुमंडल में ‘बैक रेडिएशन’ बढ़ गया है। वहीं पहाड़ों के लगातार हो रहे कटान की वजह से गर्म हवाएं बिना किसी प्राकृतिक अवरोध के सीधे मैदानी इलाकों में पहुंचकर तपन बढ़ा रही हैं।

🏔️ पहाड़ों पर भी कुदरत का खतरनाक अलार्म: मसूरी, नैनीताल और श्रीनगर में भी पारा 30 डिग्री के पार, पीछा नहीं छोड़ेगी गर्मी

कुदरत का एक सबसे चिंताजनक और डरावना अलार्म मैदानी इलाकों के साथ-साथ अब उन ठंडे पहाड़ों पर भी जोर से बज रहा है, जहां लोग अक्सर गर्मियों की छुट्टियां मनाने और राहत पाने के लिए जाते हैं। हो सकता है कि इस सीजन में आपका भी पहाड़ों पर जाने का कोई न कोई प्लान हो, लेकिन आपको जानकर झटका लगेगा कि इस बार पहाड़ भी गर्मी की आग में बुरी तरह तप रहे हैं।

ग्लोबल हीट वेव मीटर के अनुसार, जम्मू-कश्मीर की ठंडी वादियों में स्थित श्रीनगर का तापमान भी इस बार 30 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है, जिसके बाद अचानक पूरे श्रीनगर शहर में एयर कंडीशनर (AC) और कूलर की मांग में भारी उछाल आया है। उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे मसूरी और नैनीताल में भी पारा 30 डिग्री के ऊपर जा चुका है। वहीं हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में तापमान 33 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ है, तो ऊना जिले में पारा 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। यानी साफ है कि अगर आप दिल्ली-यूपी की गर्मी से छुटकारा पाने के लिए पहाड़ों में भागना चाहते हैं, तो यह कड़वी हकीकत जान लीजिए कि भीषण गर्मी वहां भी आपका पीछा नहीं छोड़ने वाली है।

❓ आखिर सूर्यदेव क्यों ढा रहे हैं ऐसा भयंकर सितम?: मौसम वैज्ञानिकों ने अल नीनो और ‘अर्बन हीट आइलैंड’ को बताया मुख्य जिम्मेदार

यहाँ आप सब के मन में एक बड़ा सवाल होगा कि आखिर इस बार प्रकृति और सूर्यदेव ऐसा विनाशकारी सितम क्यों ढा रहे हैं? मौसम वैज्ञानिकों ने इसके पीछे कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और व्यावहारिक वजहें बताई हैं:

  • पहला कारण (अल नीनो – El Nino): यह पृथ्वी की सबसे बड़ी और संवेदनशील जलवायु लहरों में से एक है। अल नीनो की स्थिति तब बनती है, जब प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य औसत से बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है। सामान्य दिनों में व्यापारिक हवाएं पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं, लेकिन जब अल-नीनो सक्रिय होता है, तो हवाएं अपनी दिशा बदलकर उल्टी दिशा में चलने लगती हैं। इससे पूरी दुनिया की वायुमंडलीय प्रणाली और बारिश का चक्र पूरी तरह बदल जाता है और इस बार भारत इसी का खामियाजा भुगत रहा है।

  • दूसरा कारण (कमजोर वेस्टर्न डिस्टर्बेंस): मार्च से मई के बीच आने वाली पश्चिमी विक्षोभ की नम हवाएं उत्तर भारत में प्री-मानसून बारिश लाती थीं, जिससे गर्मी पर समय-समय पर ब्रेक लगता रहता था। लेकिन इस बार ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ बेहद कमजोर रहा, जिसके कारण मैदानी राज्यों में बारिश बिल्कुल नहीं हुई।

  • तीसरा कारण (अर्बन हीट आइलैंड – Urban Heat Island): महानगरों और शहरों में तेजी से तापमान बढ़ने की सबसे बड़ी वजह कंक्रीट के जंगल हैं। जब शहरों में शीशे, कंक्रीट और स्टील के अंधाधुंध इस्तेमाल से गगनचुंबी बिल्डिंगें खड़ी हो जाती हैं, तो वे दिनभर गर्मी को सोखती हैं और फिर उन्हीं बिल्डिंगों में लगे लाखों AC से निकलने वाली गर्म गैसें वातावरण को भट्टी बना देती हैं। डामर और कंक्रीट से बनी चमचमाती सड़कें, वाहनों का अत्यधिक धुआं, आबादी का भारी घनत्व, शहरी हरियाली का खात्मा और जलाशयों का सूखना भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। नतीजा यह होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में इन ‘अर्बन हीट आइलैंड’ वाले शहरों का पारा 5 से 7 डिग्री तक अपने आप ज्यादा हो जाता है।

वैसे भारत में जून के महीने में आने वाला ‘दक्षिणी-पश्चिमी मानसून’ ही इस भीषण गर्मी से असली और स्थायी राहत दिलाता है, जो दक्षिण अरब सागर में प्रवेश कर चुका है। लेकिन इस बीच प्रमुख निजी मौसम एजेंसी ‘स्काईमेट’ (Skymet) ने देश के लिए एक चिंताजनक जानकारी दी है कि इस बार भारत में मानसून काफी कमजोर या सामान्य से कम रह सकता है, जिसका सीधा मतलब यह है कि इस साल गर्मी का यह दर्दनाक सीजन और ज्यादा लंबा खिंच सकता है।

🇨🇳 चीन बसा रहा है 70% हरियाली वाला दुनिया का पहला ‘शियोनगान’ फ्यूचर सिटी: एआई तकनीक से होगी एक-एक पेड़ की मॉनिटरिंग

एक तरफ जहां भारत में लगातार हरियाली और पेड़-पौधे कम होने से देश भट्टी की तरह तप रहा है, वहीं दूसरी तरफ हमारा पड़ोसी देश चीन अब पर्यावरण संरक्षण को लेकर बिल्कुल नए तरह का हाई-टेक शहर बसा रहा है। इस अनोखे शहर के कुल क्षेत्रफल के 70% हिस्से में सिर्फ और सिर्फ घनी हरियाली, जंगल और बाग-बगीचे होंगे, जबकि महज 30% हिस्से में ही कंक्रीट का भौतिक निर्माण (कंस्ट्रक्शन) किया जाएगा। चीन के इस नए ड्रीम प्रोजेक्ट का नाम ‘शियोनगान’ (Xiongan) है, जिसे वैश्विक स्तर पर एक ‘फूचर सिटी’ (Future City) के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह शहर जितना ज्यादा स्मार्ट और आधुनिक होगा, पर्यावरण और क्लाइमेट रेजिलिएंस के लिए पूरी दुनिया के सामने उतना ही बड़ा अनुकरणीय उदाहरण भी बनेगा। इसे मुख्य रूप से चीन की राजधानी बीजिंग के बढ़ते आबादी के बोझ और प्रदूषण को कम करने के लिए ‘भविष्य के शहर’ के रूप में डिजाइन किया जा रहा है।

🤖 क्यों बेहद खास और अनोखा होगा यह ‘शियोनगान’ मॉडल?: अंडरग्राउंड वैक्यूम वेस्ट सिस्टम से सीधे साफ होगा कचरा

शियोनगान शहर को वैश्विक पर्यावरण के अनुकूल और बेहद खास बनाने के लिए चीनी इंजीनियरों ने कई हैरतअंगेज तकनीकों का इस्तेमाल किया है:

  • तापमान नियंत्रण नेटवर्क: शहर के बढ़ते तापमान को हमेशा कूल रखने के लिए इसके भीतर विशाल कृत्रिम झीलों और नहरों का एक एडवांस इंटरकनेक्टेड नेटवर्क बनाया गया है। इसके अलावा, पूरे शहर को चारों तरफ से सुरक्षा कवच देने के लिए करोड़ों की संख्या में पाइन, विलो और ओक जैसे विशिष्ट पेड़ लगाए गए हैं, जो गर्मी को सोखने और वायु गुणवत्ता (AQI) को शुद्ध रखने में मदद करते हैं।

  • AI से पेड़ों की लाइव ट्रैकिंग: इस शियोनगान मॉडल की सबसे एडवांस बात यह है कि यहाँ लगाए गए प्रत्येक पेड़ में विशेष सेंसर लगाए गए हैं और ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI Technology) की मदद से उनकी लाइव ट्रैकिंग और डिजिटल निगरानी की जा रही है, ताकि उनकी हेल्थ, खाद और पानी की जरूरत का सटीक आकलन कंप्यूटर खुद कर सके।

  • इको-कॉरिडोर और गार्बेज-फ्री सिस्टम: शहर में जंगली जानवरों और जैव विविधता के स्वतंत्र संचरण के लिए विशेष ‘इको-कॉरिडोर’ विकसित किए गए हैं। नागरिकों को प्रकृति के करीब रखने के लिए हर 300 मीटर की दूरी पर सुंदर सिटी पार्क बनाए गए हैं। प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने के लिए साइकलिंग और पैदल यात्रियों के लिए बिल्कुल अलग ट्रैक्स हैं।

  • अंडरग्राउंड कचरा प्रबंधन: सबसे बेहतरीन तकनीक यहाँ की ‘गार्बेज-फ्री’ प्रणाली है। शहर के कचरे को साफ करने के लिए जमीन के नीचे ‘अंडरग्राउंड वैक्यूम वेस्ट सिस्टम’ (Underground Vacuum Waste System) का पाइप नेटवर्क बिछाया गया है, जो बिना किसी कचरा गाड़ी या ट्रकों के, घरों के कचरे को सीधे वैक्यूम प्रेशर से खींचकर रीसाइक्लिंग और प्रोसेसिंग सेंटर तक पलक झपकते पहुंचा देता है। पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन का यह शियोनगान मॉडल आने वाले समय में दुनिया भर के देशों के लिए ‘स्मार्ट’ और ‘क्लाइमेट-रेजिलिएंट’ शहर बनाने का सबसे बड़ा और इकलौता मार्गदर्शक बनेगा।

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