Justice For Twisha: ट्विशा शर्मा केस में सड़कों पर उतरे हजारों पूर्व सैनिक; भोपाल में शौर्य स्मारक से सीएम हाउस तक निकाला मार्च
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बहुचर्चित ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले ने अब एक बड़ा सामाजिक और संगठनात्मक रूप ले लिया है। इस मामले को लेकर भोपाल की सड़कों पर हजारों पूर्व सैनिकों (रिटायर्ड फौजियों) का एक अभूतपूर्व और विशाल प्रदर्शन देखने को मिला। ‘वर्दी वेलफेयर सोसाइटी’ के बैनर तले एकजुट हुए हजारों सेवानिवृत्त जवानों ने राजधानी के प्रसिद्ध शौर्य स्मारक से अपने शांतिपूर्ण न्याय मार्च की शुरुआत की। मार्च शुरू करने से पहले पूर्व सैनिकों ने देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद यह विशाल मार्च मुख्यमंत्री निवास (सीएम हाउस), पुलिस मुख्यालय (PHQ) और राजभवन तक पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर मामले में निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच और पीड़ित परिवार के लिए त्वरित न्याय की पुरजोर मांग की।
🎖️ “प्रभावशाली लोगों के दबाव में पुलिस ने एफआईआर में की देरी”: वर्दी सोशल वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष का गंभीर आरोप
इस बड़े प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे वर्दी सोशल वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त मेजर जनरल श्याम सुंदर श्रीवास्तव ने मीडिया से बात करते हुए अपने गहरे आक्रोश को व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि इस अनुशासित संगठन में भारतीय थल सेना (Army), जल सेना (Navy) और वायु सेना (Air Force) के साथ-साथ सीआईएसएफ (CISF) और सीआरपीएफ (CRPF) जैसे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों से सेवानिवृत्त जांबाज जवान व अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि, “देश की सरहदों पर सालों तक अपनी जान की बाजी लगाने वाले जवानों को रिटायरमेंट के बाद अपने ही हक और न्याय को पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं और व्यवस्था से संघर्ष करना पड़ता है।” उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस मामले में आरोपी पक्ष के प्रभावशाली व रसूखदार होने के कारण स्थानीय पुलिस पर शुरुआत से ही भारी दबाव था, जिसके चलते एफआईआर (FIR) दर्ज करने में जानबूझकर काफी समय लगाया गया। उन्होंने पूरे प्रशासनिक स्तर पर चल रही जांच की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
⚖️ “अदालत पर है पूरा भरोसा, बंद हो मृतका की छवि खराब करने की कोशिश”: प्रेस के सामने छलका पीड़ित पिता का दर्द
दूसरी ओर, इस न्याय मार्च के दौरान मौजूद पीड़ित पक्ष की तरफ से मृतका ट्विशा शर्मा के पिता का दर्द एक बार फिर सार्वजनिक रूप से छलका। उन्होंने कहा कि पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली के बाद अब उन्हें केवल माननीय न्यायालय से ही न्याय की एकमात्र उम्मीद बची है। उन्होंने कुछ स्थानीय तत्वों पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सोशल मीडिया और मीडिया के कुछ चुनिंदा हिस्सों में भ्रामक व मनगढ़ंत बयानबाजी जारी कर उनकी दिवंगत बेटी की सामाजिक छवि (Character) को जानबूझकर ठेस पहुंचाने और धूमिल करने की घटिया कोशिश की जा रही है, जो कि पूरी तरह से अमानवीय और गलत है। पीड़ित परिवार ने स्पष्ट किया कि चूंकि यह पूरा संवेदनशील मामला अभी अदालत के समक्ष विचाराधीन (Sub-Judice) है, इसलिए सभी पक्षों को न्यायिक प्रक्रिया की मर्यादा का पूरा सम्मान करना चाहिए और बेबुनियाद अफवाहें फैलाने से बाज आना चाहिए।
🛑 आरोपी को मिली अग्रिम जमानत पर पूर्व सैनिकों ने उठाए सवाल: जन-समर्थन मिलने से और संवेदनशील हुआ ट्विशा शर्मा केस
प्रदर्शन के अंतिम चरण में वर्दी वेलफेयर सोसाइटी के कोर सदस्यों ने इस मामले के एक मुख्य नामजद आरोपी को कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की वैधानिक प्रक्रिया पर भी गंभीर चिंता और तकनीकी सवाल खड़े किए हैं। पूर्व सैनिक संगठन का दृढ़ता से मानना है कि जांच के शुरुआती दौर में ही मुख्य संदिग्धों को इस तरह की कानूनी राहत मिल जाने से पुलिस जांच की दिशा और निष्पक्षता पूरी तरह से प्रभावित हो सकती है, जिससे पीड़ित मायके पक्ष को न्याय मिलने के रास्ते में बड़ी बाधा आ सकती है।
इस विशाल प्रदर्शन के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि ट्विशा शर्मा मौत मामला अब केवल एक पारिवारिक विवाद न रहकर बड़े सामाजिक समर्थन और सार्वजनिक बहस का एक राष्ट्रीय विषय बनता जा रहा है। देश की सुरक्षा करने वाले पूर्व सैनिकों के इस मुहिम से सीधे जुड़ जाने के बाद से यह पूरा मुद्दा कानून-व्यवस्था के लिहाज से और अधिक संवेदनशील हो गया है। फिलहाल, राजधानी भोपाल की जनता और पीड़ित परिवार की नजरें न्यायालय के अगले कड़े रुख और पुलिस की अंतिम क्लोजर रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।