रायपुर: होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रही अमेरिका और ईरान की नाकाबंदी के चलते कच्चे तेल की किल्लत बढ़ती जा रही है। इसका असर भारत पर भी पड़ रहा है। रायपुर में पेट्रोल-डीजल की दिक्कतों को लेकर कई पेट्रोल पंपों पर ‘नो स्टॉक’ का बोर्ड भी लगा दिया गया है। डीजल की बढ़ती किल्लत को देखते हुए रायपुर रेल मंडल ने इस डिवीजन में चलने वाले सभी डीजल इंजन को हटाने और संख्या में कटौती करने की तैयारी शुरू कर दी है।
🚂 हटाए जाएंगे रेल डीजल इंजन: 20 से 25% क्षमता कम करने की योजना
रायपुर रेल मंडल के सीनियर डिवीजनल कमर्शियल मैनेजर (सीनियर डीसीएम) अवधेश कुमार त्रिवेदी ने कहा, “अभी हमारे पास जो डीजल इंजन की क्षमता है, उसमें से 20 से 25% डीजल इंजन को कम करने की योजना पर काम चल रहा है। इसको लेकर प्रशासनिक स्तर पर बैठक भी हुई है। इंजनों की संख्या कम करना तय है, लेकिन अभी इस पर पूर्ण निर्णय और अंतिम मुहर लगनी बाकी है।”
📊 स्टॉक की कमी नहीं, फिर भी बदलाव जरूरी: सीनियर डीसीएम का बयान
सीनियर डीसीएम ने स्पष्ट किया कि रायपुर डिवीजन में तेल के स्टॉक की कोई कमी नहीं है और न ही स्टॉक के कारण कोई परिचालन प्रभावित होगा। उन्होंने कहा, “हमारे पास तेल का पर्याप्त भंडार है। लेकिन डीजल इंजन को हटाना है, इसकी योजना पहले से है और हम इस पर काम कर रहे हैं। जो व्यवस्था अभी हमारे पास है, उसमें से 20 से 25 फीसदी डीजल इंजनों को कम किया जाएगा।”
⚙️ रायपुर रेल मंडल का गणित: 30 में से 8 इंजन परिचालन से होंगे बाहर
सीनियर डीसीएम ने बताया कि रायपुर रेल मंडल में वर्तमान में कुल 30 डीजल (लोकोमोटिव) इंजन मौजूद हैं। यदि निर्धारित 20 से 25% की कटौती की जाती है, तो लगभग 8 डीजल इंजन रायपुर रेल मंडल के दैनिक परिचालन कोटे से बाहर कर दिए जाएंगे। यह कदम भविष्य की ईंधन सुरक्षा और परिचालन दक्षता को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है।
🌍 ईरान-अमेरिका युद्ध और भविष्य की राह: नए प्रारूप की तैयारी में रेलवे
माना जा रहा है कि वैश्विक डीजल संकट को देखते हुए भारतीय रेलवे अब नए और आधुनिक प्रारूप में जाने की तैयारी शुरू कर चुका है। इसको लेकर रायपुर में भी कवायद तेज हो गई है। रायपुर रेल मंडल में जितने डीजल इंजन हैं, उनमें शुरुआती तौर पर कटौती की योजना है और इसकी मंडल स्तर पर निरंतर समीक्षा की जा रही है। इसका उद्देश्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाना भी है।
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