Local & National News in Hindi
Logo
ब्रेकिंग
Rajasthan Crime: अलवर में थाने पर पथराव, पुलिसकर्मी जख्मी; बुलेट जब्ती के विरोध में हिंसक हुई भीड़ Punjab News: 'बेअदबी बर्दाश्त नहीं'; सीएम भगवंत मान ने शुरू की शुक्राना यात्रा, श्री दरबार साहिब में... Google Chrome Alert: सावधान! बिना परमिशन 4GB की फाइल डाउनलोड कर रहा है क्रोम; जानें क्या है यह पूरा ... Supreme Court on Bihar Police: रिश्वत कांड में नया मोड़! चूहों ने निगले पैसे? सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस... Dragon Update: सलमान-अजय को टक्कर देने वाला ये विलेन अब जूनियर NTR से भिड़ेगा; 'ड्रैगन' को लेकर आया ... US-Iran Relations: ईरान के आगे झुका अमेरिका? तेहरान की शर्तों पर युद्धविराम की चर्चा के बीच ट्रंप के... Mother’s Day 2026: कौन हैं अष्ट वसु, 11 रुद्र और 12 आदित्यों की माता? जानें सनातन धर्म में सृष्टि की... BCCI Schedule 2026: क्या ऑस्ट्रेलिया 'A' के खिलाफ खेलेंगे वैभव सूर्यवंशी? बीसीसीआई ने महिला टीम की न... Digital Detox: रोज सिर्फ 1 घंटा फोन से रहें दूर; तनाव कम करने और बेहतर नींद के लिए जानें डिजिटल डिटॉ... Business Idea: शिलाजीत की खेती नहीं खोज से होती है लाखों की कमाई; जानें कहाँ मिलता है यह 'काला सोना'...

Vat Savitri Vrat 2026: 16 मई को है वट सावित्री पूजा; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पौराणिक कथा

70

Vat Savitri Vrat: हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन का आधार माना जाता है. यह पर्व 16 मई को मनाया जाएगा. ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पड़ने वाला यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए किसी तपस्या से कम नहीं है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सावित्री ने अपनी बुद्धिमानी और दृढ़ संकल्प से मृत्यु के देवता यमराज को भी पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था. यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि यदि नारी का विश्वास सच्चा हो तो वह बड़े से बड़े संकट को भी टाल सकती है. महिलाएं इस दिन व्रत रखकर वट वृक्ष की विशेष पूजा करती हैं और अपने परिवार की खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगती हैं

सावित्री और सत्यवान की कथा का महत्व

वट सावित्री व्रत का सीधा संबंध सावित्री और उनके पति सत्यवान की पौराणिक कथा से है. कथा के अनुसार, जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे, तब सावित्री ने हार नहीं मानी और अपने पति की सुरक्षा के लिए यमराज के पीछे-पीछे चल दीं. उनकी अटूट निष्ठा और तर्कों से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान मांगने को कहा, जिसके जरिए सावित्री ने चतुराई से अपने पति का जीवन पुनः प्राप्त कर लिया. सावित्री ने बरगद के पेड़ के नीचे ही अपने पति को दोबारा जीवित पाया था, तभी से इस वृक्ष को पूजने की परंपरा चली आ रही है. यह कथा हमें सिखाता है कि निस्वार्थ प्रेम और धर्म के मार्ग पर चलने से हम नियति को भी बदल सकते हैं.

वट वृक्ष की महिमा

सुहागिन महिलाएं इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा बहुत ही श्रद्धा के साथ करती हैं. हिंदू धर्म में बरगद को ‘वट’ कहा जाता है, जिसमें त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निवास माना गया है. इसकी लंबी शाखाएं और हवा में लटकती जड़ें अमरता और अटूट रिश्ते का प्रतीक हैं. महिलाएं पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत लपेटकर सात बार परिक्रमा करती हैं, जो उनके और उनके पति के बीच सात जन्मों के पवित्र बंधन को दर्शाता है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

Don`t copy text!