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पशुपालन विभाग, मामला एक ही परिणाम दो,एक को मिला सस्पेंशन,बाकियों को मिल रही कार्यवाही से रियायत,आखिर किसकी हैं मेहरबानियां !

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मामला एक परिणाम दो,पशुपालन विभाग में अनुचित तरीके से सार्थक ऐप में उपस्थिति दर्ज करने का,एक सस्पेंड बाकी अन्य पर आखिर मेहरबानी क्यों!

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर

पशुपालन विभाग के डॉक्टर पहली बात तो कहीं पाए नहीं जाते हैं। और आते भी है तो वह अनुचित तरीके से अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने के मामले में उलझे हुए हैं। लेकिन इंदौर में ऐसे ही दो मामले है जिनमें एक EVFO को इंदौर कलेक्टर ने तुरंत सस्पेंड कर दिया था। जबकि दूसरे मामले में अनुचित तरीके से सार्थक ऐप में उपस्थिति दर्ज करवाने वाले डॉक्टरों को बक्शा जा रहा हैं। मामले दो है लेकिन परिणाम अलग अलग। लिहाजा अब पशुपालन विभाग के ऐसे डॉक्टरों पर मेहरबानियों किसकी है, ऐसे सवाल खड़े हो रहे हैं।

पहला मामला कुछ ये हैं।

दरअसल कलेक्टर शिवम वर्मा ने 15 दिसंबर 2025 को पशुपालन विभाग के सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी मधु रावत को अनुचित तरीके से NIC की सार्थक ऐप पर अनुचित तरीके यानि वीडियो कॉल के जरिए हाजरी लगवाने के मामले में सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 9 के अंतर्गत सस्पेंड कर दिया था। लेकिन ऐसे ही दूसरे मामले में अभी तक पशुपालन विभाग के ऐसे डॉक्टरों पर कार्यवाही अभी बाकी हैं। या कहे कि लंबे समय से जांच के नाम पर उक्त कार्यवाही टलती जा रही हैं।

दूसरा मामला कुछ यूं हैं।

जीपीओ पशु हॉस्पिटल में अटैच की डॉक्टर मिताली मेहता,पूनम त्रिपाठी और शिप्रा की डॉक्टर गोल्डी श्रीवास्तव पर भी NIC की सार्थक ऐप पर अन्य सहायक कर्मचारियों की मदद से वीडियो कॉल के जरिए हाजरी लगवाने के मामले में जांच जारी हैं लेकिन अभी तक इन ऐसे डॉक्टर पर कार्यवाही नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा हैं। जबकि उक्त पूरे मामले की जांच इंदौर के अपर कलेक्टर कर रहे हैं, जो कि महीनों से चल रही हैं।

पूर्व में तीन दिनों में कार्यवाही।

पूर्व में AVFO मधु रावत को ऐसे ही मामले में मात्र तीन दिनों में ही निलंबित कर दिया गया था। लेकिन बताया जा रहा है कि NIC की रिपोर्ट के बावजूद इन तीनों ही पशु चिकित्सक डॉक्टर मिताली मेहता, डॉक्टर पूनम त्रिपाठी और गोल्डी श्रीवास्तव पर महीने गुजर जाने के बावजूद भी कार्यवाही होने का नाम नहीं ले रही हैं।

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