IDA, लीज नवीनीकरण के लिए संपदा शाखा में चल रहा बेक डेट के नक्शे पर रिन्यू करने का खेल,जिम्मेदार संपदा अधिकारी न करते न जांच न कोई सवाल,बस हो जाता काम।
IDA की संपदा शाखा में चल रहा खेला,फोटोकॉपी वाला बनवा रहा पुरानी तारीख में नक्शे
शाखा की स्कीम 78 में चल रहा झोल पर झोल,जिम्मेदारों की मिली मौन स्वीकृति।

✍️ अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर।

इंदौर विकास प्राधिकरण की संपदा शाखा में झोल पर झोल कायम हैं। दरअसल आईडीए की योजना क्रमांक 78 की लीज नवीनीकरण को लेकर संपदा शाखा के जिम्मेदारों से लेकर नगर निगम इंदौर के कुछ तथाकथित भी इस पूरे कांड में शामिल हैं। वह इसलिए क्योंकि ida के ही नजदीक पानी की टंकी के पास फोटोकॉपी दुकान संचालक और IDA के जिम्मेदारों में भ्रष्टाचार की डील हो रही है। इधर नगर निगम इंदौर और इंदौर विकास प्राधिकरण के जिम्मेदार अधिकारी बेफिक्र होकर बैठे हैं। क्योंकि हम यह इसलिए कह रहे है क्योंकि अगर पिछले एक वर्ष में IDA की स्कीम 78 की रिन्यू की गई लीज के दस्तावेजों की जांच जाए और निगम रिकॉर्ड से इसका मिलान किया गया। तो फिर एक और बड़ा घोटाला उजागर हो जाएगा।
IDA की अलग अलग योजनाओं में चल रहा ऐसा खेला

इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 78 की लीज अवधि खत्म होने के बाद इन्हें रिन्यू करने के लिए संपत्ति के दस्तावेजों के साथ निर्माण की परमिशन,और सबसे ज्यादा जरूरी नगर निगम का स्वीकृत नक्शे की दरकार होती हैं। लिहाजा अब इन लीज नवीनीकरण प्रक्रिया के लिए आईडीए ,भूखंड धारक और नगर निगम इंदौर से जुड़े तथाकथित लोगों ने फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए बेक डेट में नक्शा स्वीकृत करने का गैंग संचालित किया जा रहा हैं। यही नहीं प्रति बेक डेट नक्शे के एवज में हजारों रुपयों की भूखंड धारकों से वसूली भी की जा रही हैं।
पुराने नक्शे में ही हेरफेर

इंदौर विकास प्राधिकरण की अलग अलग स्कीमों में लोगों ने भूखंड तो आवंटित करवा लिए हैं। लेकिन कई भूखंड धारक ऐसे भी है जिन्होंने भूखंड या तो खाली छोड़ दिया हैं। या फिर नगर निगम से स्वीकृत नक्शों के विपरीत ही निर्माण किया हैं। लिहाजा ऐसे हालातों में फोटोकॉपी शॉप चलाने वाला एक शख्स और संपदा शाखा से जुड़े जिम्मेदारों की मिलीभगत के चलते स्वीकृत नक्शे में ही हेरफेर किया जा रहा है। और उसे वर्तमान का बताते हुए इंदौर विकास प्राधिकरण की संपदा शाखा में प्रस्तुत किया जा रहा हैं। जिसका न ही कोई अवलोकन होता है और न ही संपदा अधिकारी मनीष श्रीवास्तव द्वारा जांच की जाती हैं। और संबंधित व्यक्ति की बेक डेट में नक्शे होने के बावजूद भी उसकी लीज नवीनीकरण तक हो जाती हैं।
एक साल की ही हुई जांच तो होगा बड़ा खुलासा।

न्यूज विथ तड़का डॉट कॉम स्कीम 78,सहित अन्य इंदौर विकास प्राधिकरण की योजनाओं से संबंधित जो खुलासा कर रहा है। जिस तरह से बेक डेट में नक्शे स्वीकृत करवाते हुए संपदा शाखा और अन्य लोगों का गैंग कैसे खेल को अंजाम दे रहा हैं। लिहाजा अगर उक्त ऐसे प्रकरणों की जांच होती है तो संपदा शाखा का एक और बड़े खेल का खुलासा हो जाएगा।