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शहर “महाजाम” की बीमारी से बीमार,नहीं हो रहा स्थाई उपचार,शहरी सीमा,बायपास,रिंगरोड हर तरफ परेशान होते वाहन चालक, जनप्रतिनिधि,अधिकारी रस्म निभाकर कर लेते है जिम्मेदारी से इतिश्री।

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शहर,बायपास या फिर रिंगरोड,हर तरफ “महाजाम” वाहन चालक खौफ़जदा जाम से परेशान। नहीं निकल रहा निकाल।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर

इंदौर शहर भले देशभर में सबसे स्वच्छ शहर का तमगा लिए हुए हो। लेकिन शहरी सीमा हो या फिर रिंगरोड या फिर बायपास। हर तरफ महाजाम जैसे हालात आसानी से देखे जा सकते हैं। हर जगह वाहन चालक आपस में गुत्थम गुत्था होते रहते हैं। सबसे ज्यादा खराब हालात शाम चार से रात नौ बजे तक हो जाते हैं। इस दौरान शहरी सीमा की सड़के वाहनों से पटी रहती हैं। तो रिंगरोड और बायपास जैसी सड़कों पर वाहन चालकों का दम निकल जाता हैं। महाजाम जैसे हालातों में वाहन रेंग भी नहीं सकते हैं। घंटों तक वाहन चालक परेशान होते रहते हैं। लेकिन शहर के जनप्रतिनिधि मात्र जनता को ढांढस बांध देते हैं वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और पुलिस अमला मात्र कार्यवाही करते हुए इतिश्री कर लेते हैं। मगर किसी के पास दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही जाम की समस्याओं का किसी के पास कोई स्थाई उपचार नहीं हैं।

ई रिक्शा,ऑटो, आई बस, सुविधा की बजाय बनी दुविधा।

पर्यावरण को देखते हुए शहरी सीमा में ई रिक्शा, ई ऑटो, आईबस जैसे सार्वजनिक परिवहन की शुरुआत तो कर दी गई।लेकिन इन में ई रिक्शा और ई ऑटो जैसे साधन सुविधा की बजाय शहर की जनता के दुविधा और परेशानी की वजह साबित हो रहे हैं। MG रोड,जवाहर मार्ग, रेलवे स्टेशन, सहित राजवाड़ा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में इनकी दादागिरी बद इंतजामी से हर कोई दुखी हैं। क्योंकि ई रिक्शा और ऑटो चालक कहीं भी घुस जाते हैं। जिसकी वजह से यातायात बहुत बुरी तरह प्रभावित होता हैं।

बायपास अधूरे कार्य,गड्ढे,और कटी फटी सड़के।

बायपास पर NHAI द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों की वजह से बायपास पर वाहन चलाना आसान नहीं हैं। क्योंकि अधूरे कार्य,खराब सड़के, सड़को पर गड्ढे और कटी फटी सड़के कभी भी दुर्घटना को आमंत्रित करते रहते हैं।

रिंगरोड उपनगरीय,अन्य बसों का कब्ज़ा।
इधर शहर का पश्चिमी रिंगरोड हो या पूर्वी रिंगरोड हर जगह उपनगरीय,अन्य लंबी दूरी की बसों का कब्ज़ा जमा हुआ हैं। उक्त बसें कहीं खड़ी हो जाती है। मुख्य सड़को पर पार्किंग हो जाती हैं। उक्त बस संचालकों के आपसी विवाद,सवारियों की जद्दोजहद की वजह से शहर का वाहन चालक परेशान होता रहता हैं। इस दौरान कई बार हादसे भी हो चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद भी जिम्मेदार हमेशा औपचारिकता वाली कार्यशैली अपनाते हुए अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर लेते हैं।

 

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