Delhi-Dehradun Expressway: दिल्ली से देहरादून का सफर होगा सस्ता, 25 नई इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी
उत्तराखंड में बुनियादी ढांचे और जनसुविधाओं को लेकर सरकार ने चौतरफा मोर्चा खोल दिया है. परिवहन से लेकर स्वास्थ्य और पेयजल तक, राज्य में आधुनिकता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. दिल्ली और देहरादून के बीच का सफर अब न केवल छोटा, बल्कि पूरी तरह प्रदूषण मुक्त होने वाला है. उत्तराखंड परिवहन निगम (रोडवेज) ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर 25 नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की योजना बनाई है. इसके लिए निगम ने शासन को प्रस्ताव तैयार कर भेज दिया है.
एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद अब दिल्ली से देहरादून की दूरी सिमटकर 210 किलोमीटर रह गई है. चूंकि एक इलेक्ट्रिक बस फुल चार्ज होने पर लगभग 250 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है, इसलिए यात्रियों को रास्ते में बस चार्ज होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा. रोडवेज महाप्रबंधक (संचालन) क्रांति सिंह के अनुसार, इस हाईटेक और सुगम यात्रा को जल्द शुरू करने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी गई है. इससे सफर को आप बजट में पूरा कर सकेंगे.
राजपुर क्षेत्र को मिलेगी पेयजल किल्लत से मुक्ति
देहरादून के राजपुर विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से पुरानी और क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों के कारण स्थानीय लोग पानी की समस्या झेल रहे थे. इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक खजान दास ने 5.80 करोड़ रुपये की पेयजल परियोजनाओं का भूमि पूजन किया.
इस बजट के माध्यम से कांवली रोड, कोमेट कॉलोनी और कबीर डेरी गली जैसे प्रमुख वार्डों में नई पाइपलाइनें बिछाई जाएंगी. मंत्री ने कार्य की गुणवत्ता पर जोर देते हुए अधिकारियों को चेतावनी दी है कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार या घटिया सामग्री का उपयोग होने पर सख्त कार्रवाई होगी.
गांधी अस्पताल में हृदय रोगों का इलाज अब होगा आसान
राजधानी देहरादून के गांधी शताब्दी अस्पताल में जल्द ही हृदय रोगियों को विशेषज्ञ उपचार मिलना शुरू हो जाएगा. वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट और एचएनबी मेडिकल विवि की कुलपति डॉ. भानु दुग्गल ने अस्पताल का निरीक्षण कर एक सप्ताह के भीतर हृदय ओपीडी (OPD) शुरू करने के निर्देश दिए हैं.
प्रारंभिक योजना के अनुसार, सप्ताह में दो से तीन दिन हृदय रोगियों के लिए ओपीडी संचालित की जाएगी. इसके अतिरिक्त, गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल में एक महीने के भीतर कैथलैब शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी.
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