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यह कैसी समीक्षा? सालों से राजस्व अमला आवेदकों को खिला रहा चक्कर,राजस्व प्रकरणों में सिर्फ होती खानापूर्ति,मिलती तारीख पर तारीख।

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तहसील कार्यालय में 6- 6 महीनों से चक्कर लगा रहे मजबूर आवेदक

15, 30, और 45 दिनों की समय अवधि में नहीं होते काम

कलेक्टर की मॉनिटरिंग, नसीहत, डांट भी पटवारी, आरआई, तहसीलदारों पर बेअसर।

इंदौर।
तहसील कार्यालय में सीमांकन और बटांकन जैसे काम के लिए आवेदन करने के बाद महीनो तक आवेदन लंबित पड़े रहते हैं। कभी पटवारी नहीं मिलता है, कभी कंसल्टेंट के पास समय नहीं होता, तो कभी तहसीलदार भी ड्यूटी पर कहीं ओर होते हैं। कुल मिलाकर तरह-तरह के बहानेबाजी और प्रकरणों के निराकरण में पांच-पांच, से छह महीने और एक साल से भी ज्यादा समय लग जाता हैं। कई मामलों में तो दो दो साल में भी इनका निराकरण नहीं हो रहा है।

राजस्व प्रकरणों की समीक्षा क्या सिर्फ नाम की?

कलेक्टर द्वारा सीमांकन, बटांकन, टर्मिम, नामांतरण और फील्डबुक बनाने जैसे काम समय सीमा में पूरे करने के निर्देश दिए जाते हैं। कई बार कार्रवाई भी की गई हैं। लेकिन बावजूद इसके राजस्व अमले पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। राजस्व अमले का आवेदक से व्यवहार देखकर लगता है कि कलेक्टर की बात का उन पर कोई असर नहीं होता हैं, और इनकी मनमानी हमेशा जारी रहेगी। फिर चाहे कोई भी कलेक्टर आए या जाएं
राजस्व अमले के व्यवहार और कार्यप्रणाली से लगता है कि समीक्षा कैसे होती होगी और वह क्या रिपोर्ट देते होंगे। क्योंकि आज भी पिछले साल वर्ष 2024 के आवेदन तहसीलों में लंबित है।

नवंबर से चक्कर लगा रहे आवेदक

पिपलिया कुमार के आवेदको की
राजस्व में मैदानी हकीकत पता करने के लिए जब हम इंदौर तहसील पहुंचे तो पिपलिया कुमार के दो ऐसे आवेदक मिले जिन्होंने नवंबर 2024 में आवेदन किया था। लेकिन इस बीच 3 तहसीलदार बदल गए। मगर उनके प्रकरण निराकृत नहीं किए गए। इतना ही नहीं इस दौरान कुछ अधिवक्ताओं से चर्चा हुईं तो उन्होंने बताया कि सभी तहसीलों के यही हाल हैं। और प्रत्येक तहसील में 100-100 से अधिक ऐसे प्रकरण है, जो तीन-चार महीने से अधिक समय से चल रहे हैं। लेकिन जादूगर पटवारी, आरआई और तहसीलदार उनका निराकरण करने में बहाने बना रहे हैं।

ये कैसी समीक्षा

राजस्व प्रकरणों की प्रत्येक सप्ताह कलेक्टर समीक्षा करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि बैठक में लगातार कई सप्ताह तक प्रकरणों के मामले में तहसीलदार क्या जवाब देते होंगे। क्या समीक्षा बैठक के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। 

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