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चर्चाओं में इंदौर विकास प्राधिकरण का लेखा विभाग

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चर्चाओं में आईडीए का लेखा विभाग,
वर्षों से जमे अधिकारी कर्मचारी,

इंदौर।
इंदौर विकास प्राधिकरण यूं तो हमेशा से ही किसी न किसी बात को लेकर चर्चाओं में बना रहा है। लेकिन इस वक्त आईडीए का लेखा विभाग और उसके अधिकारी प्रगति जैन और राजेंद्र पोरवाल सहित पूरा के पूरा लेखा विभाग काफी चर्चाओं में है। क्योंकि जिस तरह लेखा विभाग में प्रतिदिन मलाई की गंगा जो बह रही है। जिसमें यह दोनों अधिकारी हो या फिर अन्य कर्मचारी लगभग प्रतिदिन ही अपने हाथ कढ़ाई में डुबोए रहते है। आईडीए लेखा विभाग के बारे में खुद आईडीए के ही विश्वनीय सूत्र बताते है कि यहां प्रतिदिन लाखों की वर्षा होती है।

रोजाना बड़े बिल और मामला पूरी तरह सेट

आईडीए के सूत्र बताते हैं कि लेखा विभाग में प्रतिदिन करोड़ों रुपए का लेनदेन उक्त विभाग द्वारा किया जाता है। इसी लेनदेन में से इन अधिकारियों जिनमें चीफ एकाउंटेंट प्रगति जैन और असिस्टेंट एकाउंटेंट राजेंद्र पोरवाल का अपना एक तय हिस्सा बना हुआ है। इसके अलावा यहां के अदने कर्मचारी भी कुछ कम नहीं है, क्योंकि इन दोनों ही अधिकारियों से लगभग आधा हिस्सा उक्त बंदर बांट में उनका भी शामिल होता हैं।

सूत्र कहते है भारी भरकम झोल

इधर आईडीए के सूत्र बताते है कि प्रति बिल स्वीकृति पर एक तय प्रतिशत किया गया हैं। जिसको समझा जाए तो दोनों ही अधिकारी प्रतिदिन लगभग लाखों की बेटिंग तक लेते हैं। यहीं नहीं यहां पदस्थ अदने भी इनसे कुछ कम नहीं है। क्योंकि वह भी अच्छा खासा हिस्सा रोजाना लेकर उठते हैं।

अब सीधे रिटायरमेंट पर ही रवानगी।

इंदौर विकास प्राधिकरण लेखा विभाग में कई अंगद तो ऐसे है जिनकी पूरी नौकरी ही लेखा विभाग में गुजर गई। और जाने की बात की जाए तो वरिष्ठ अधिकारियों के रहमो कर्म के चलते उनके रिटायरमेंट के बाद ही इन अंगदों की बिदाई हो पाएगी।

शिकायत होती लेकिन सुनता कोई नहीं।

इधर आईडीए से जुड़े कई ठेकेदार हो या फिर निर्माण एजेंसियां लेखा विभाग से जुड़े अधिकारियों प्रगति जैन,राजेंद्र पोरवाल की दर्जनों शिकायतें कर चुके है। लेकिन आईडीए के ही जिम्मेदार उक्त शिकायतों को लेकर कोई भी ठोस कदम उठाने से परहेज करते है। अब ऐसा वह क्यों कर रहे है। इसका जवाब उन्हें ही पता है। लेकिन कही न कही कार्यवाही के नाम पर शिथिल कार्यशैली के चलते खुद अब जिम्मेदारों के पत्ते भी अपने आप खुल रहे है।

 

 

 

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