Local & National News in Hindi
Logo
ब्रेकिंग
Neemuch News: नीमच में प्रशासन का बड़ा एक्शन; फर्म से मिला अखाद्य सल्फर और हाइड्रा केमिकल, फैक्ट्री ... MP Rajya Sabha Election: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की रणभेरी; तीसरी सीट पर उलझा कांग्रेस का सिय... MP Weather Update: मध्य प्रदेश में नौतपा से पहले ही भीषण गर्मी का टॉर्चर; नौगांव में पारा 46.8 डिग्र... Morena Road Protest: मुरैना में नगर निगम के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन; बदहाल सड़क से भूत भगाने के लिए बुल... Jabalpur NCC Camp: जबलपुर में भीषण गर्मी का कहर; NCC कैंप के 31 कैडेट्स बीमार, 10 आईसीयू में भर्ती Indore Crime News: इंदौर में रुकवाया गया बाल विवाह; 13 साल की बच्ची से शादी कर रहा था 42 का अधेड़, 1... Super El Nino Impact: मई-जून में क्यों उबल रहा है देश? मौसम वैज्ञानिकों ने दी मानसून कमजोर होने और स... RG Kar Case: आरजी कर के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर नगर निगम का बड़ा एक्शन; अवैध घर गिराने का आदेश West Bengal Free Bus Scheme: बंगाल में 1 जून से महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा; इस तरह ... India-Bangladesh Border: भारत-बांग्लादेश सीमा पर अभेद्य सुरक्षा; BSF ने खुले हिस्सों में शुरू किया ब...

JTET 2026 Row: जेटेट भाषा विवाद पर मंत्रियों की कमेटी में दरार; 3:2 के बहुमत से भोजपुरी-मगही को शामिल करने की सिफारिश

2

रांची: झारखंड में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी जेटेट 2026 (JTET 2026) की नियमावली में भोजपुरी, मगही, अंगिका और मैथिली को क्षेत्रीय भाषा की आधिकारिक सूची से बाहर किए जाने से उपजे विवाद को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा गठित पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय मंत्रियों की कमेटी की दूसरी महत्वपूर्ण बैठक भी पूरी तरह से बेनतीजा समाप्त हो गई। इस मैराथन बैठक के दौरान मंत्रियों की यह कमेटी आंतरिक रूप से 3:2 के स्पष्ट अनुपात में विभाजित नजर आई।

कमेटी में शामिल कांग्रेस कोटे के मंत्री राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय सिंह तथा राजद (RJD) कोटे के मंत्री संजय प्रसाद यादव ने राज्य के व्यापक जनहित को देखते हुए इन चारों भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा के रूप में पुनः शामिल करने का पुरजोर समर्थन किया। वहीं, दूसरी ओर झामुमो (JMM) कोटे के मंत्री योगेंद्र प्रसाद और सुदिव्य कुमार सोनू इन भाषाओं को नियमावली में शामिल करने के सख्त विरोध में डटे रहे। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, इसके बावजूद कमेटी ने 3:2 के बहुमत के आधार पर मुख्यमंत्री को सौंपी जाने वाली अपनी अंतिम अनुशंसा में इन चारों भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल करने की मजबूत सिफारिश की है। इस फैसले से पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा, देवघर और गोड्डा समेत कई सीमावर्ती जिलों के लाखों भाषा-भाषी अभ्यर्थियों को जेटेट परीक्षा में शामिल होने का बड़ा अवसर मिल सकेगा।

👥 कमेटी के गठन पर झामुमो (JMM) ने उठाए सवाल: सुदिव्य कुमार सोनू ने लगाया जनजातीय-अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व न होने का आरोप

इस हाई-प्रोफाइल बैठक की सबसे चर्चित और विवादित बात यह रही कि झामुमो कोटे के कद्दावर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कमेटी के बुनियादी ढांचे पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने आधिकारिक तौर पर यह गंभीर मुद्दा उठाया कि झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में इतनी बड़ी भाषाई नीति तय करने वाली इस विशेष कमेटी में किसी भी जनजातीय (Tribal) या अल्पसंख्यक समुदाय के मंत्री को शामिल क्यों नहीं किया गया है। सुदिव्य सोनू के इस बयान ने राज्य की राजनीति में गठबंधन के भीतर ही एक नया आंतरिक विवाद खड़ा कर दिया है, जिससे इस भाषाई विवाद को अब जातीय और सामाजिक रंग मिलने लगा है।

🎤 “मुख्यमंत्री चाहें तो करें कमेटी का पुनर्गठन”—संयोजक सह वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने दिया दो टूक बयान

मंत्रियों की इस विशेष कमेटी के संयोजक और राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बैठक की समाप्ति के बाद मीडिया कर्मियों को संबोधित करते हुए स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, “आज की यह बैठक हमारी ओर से दूसरी और अंतिम बैठक थी। हमने सभी मंत्रियों के रुख को दर्ज कर लिया है। अब अगर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस कमेटी में जनजातीय और अल्पसंख्यक समुदाय के मंत्रियों को शामिल करके इसका पुनर्गठन (Reconstitution) करना चाहते हैं, तभी भविष्य में कोई तीसरी बैठक बुलाई जाएगी, अन्यथा हमारी ओर से आज की बैठक ही अंतिम मानी जाए।” उन्होंने आगे बताया कि इन दो दिनों की बैठकों की पूरी आधिकारिक कार्यवाही और सभी मंत्रियों की व्यक्तिगत व दलीय राय को समाहित करते हुए एक विस्तृत विस्तृत रिपोर्ट बहुत जल्द मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सौंप दी जाएगी।

😡 पूरी तैयारी के साथ नहीं पहुंचे कार्मिक और शिक्षा सचिव: मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बैठक में जताई तीखी नाराजगी

इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान प्रशासनिक सुस्ती भी खुलकर सामने आई। पहली बैठक की तरह इस दूसरी बैठक में भी कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग और स्कूली शिक्षा विभाग के सचिव पूरी व सटीक जानकारी लेकर मंत्रियों के सामने उपस्थित नहीं हो सके। राज्य के विभिन्न प्रमंडलों में वास्तविक रूप से बोली जाने वाली क्षेत्रीय भाषाओं, उन भाषाओं को पढ़ने वाले छात्रों की कुल संख्या और स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता संबंधी कोई भी प्रामाणिक आंकड़े व डेटा टेबल मंत्रियों के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए गए। अधिकारियों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर कांग्रेस मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बैठक के दौरान ही अपनी तीखी नाराजगी व्यक्त की और अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।

वर्तमान राजनीतिक व प्रशासनिक परिदृश्य में भले ही कमेटी की आधिकारिक अनुशंसा 3:2 के बहुमत से चारों विवादित भाषाओं को जेटेट में शामिल करने के पक्ष में तैयार है, लेकिन इस संवेदनशील नीतिगत मामले पर अंतिम और सर्वोपरि फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ही करना है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री इस रिपोर्ट के आधार पर सीधे कैबिनेट में प्रस्ताव लाते हैं या झामुमो के दबाव में कमेटी का पुनर्गठन करते हैं।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

Don`t copy text!