जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर में रिकॉर्ड तोड़ पड़ रही भीषण गर्मी के बीच ट्रिपल आईटीडीएम (IIITDM) परिसर में आयोजित राष्ट्रीय कैडेट कोर यानी एनसीसी (NCC) का ट्रेनिंग कैंप कैडेट्स के लिए बड़ी आफत बन गया है। कैंप के दौरान भीषण तपिश, डिहाइड्रेशन और संभावित फूड पॉइजनिंग के चलते अचानक 31 से ज्यादा कैडेट्स की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। बीमार होने वाले बच्चों में 15 लड़के और 16 लड़कियां शामिल हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए सभी प्रभावित बच्चों को सैन्य व प्रशासनिक एंबुलेंस और अन्य वाहनों की मदद से तत्काल विक्टोरिया जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों की विशेष टीम की देखरेख में उनका आपातकालीन इलाज जारी है।
🌡️ 45 डिग्री पारे में चल रही थी आउटडोर ट्रेनिंग: खाना खाने और दूषित पानी पीने के बाद बिगड़ी बच्चों की हालत
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ट्रिपल आईटीडीएम परिसर में आगामी 14 मई से इस एनसीसी विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया था। इस कैंप में जबलपुर संभाग सहित आस-पास के कई जिलों के 450 से ज्यादा होनहार कैडेट्स हिस्सा लेने पहुंचे थे। इस कैंप का समापन 24 मई को होना था, लेकिन पिछले चार दिनों से जबलपुर का तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है।
बीमार कैडेट्स ने डॉक्टरों को बताया कि चिलचिलाती धूप में खुले मैदान में कठिन फिजिकल ट्रेनिंग करने और रात का खाना खाने के बाद उन्हें अचानक तेज उल्टी, पेट दर्द, घबराहट और अत्यधिक कमजोरी महसूस होने लगी। कुछ कैडेट्स ने कैंप में पीने के लिए रखे पानी के दूषित होने की आशंका भी जताई है।
🏥 विक्टोरिया जिला अस्पताल के आईसीयू में 10 कैडेट्स भर्ती: सीएमएचओ डॉ. नवीन कोठारी बोले—”फिलहाल सभी बच्चे खतरे से बाहर”
जिला अस्पताल के वार्डों और आईसीयू (ICU) में भर्ती कैडेट्स की गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों की एक सीनियर टीम लगातार पैनी नजर बनाए हुए है। अत्यधिक डिहाइड्रेशन और चेस्ट पेन की शिकायत के चलते 10 कैडेट्स की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया है। विक्टोरिया अस्पताल के सीएमएचओ (CMHO) डॉक्टर नवीन कोठारी ने मेडिकल बुलेटिन जारी करते हुए बताया कि रात करीब 8 बजे से बच्चों का अस्पताल आना शुरू हुआ था। किसी को गंभीर पेट दर्द, उल्टी, घबराहट तो कुछ बच्चों को सीने में दर्द (Chest Pain) की शिकायत थी।
उन्होंने बताया कि प्रारंभिक स्थिति में बच्चों की तबीयत बहुत ज्यादा खराब थी, लेकिन एंटीबायोटिक, दर्द निवारक इंजेक्शन, आवश्यक दवाइयां और ग्लूकोज की बोतलें चढ़ाने के बाद सभी बच्चे पूरी तरह स्थिर और खतरे से बाहर हैं।
🧪 फूड इंस्पेक्टर और स्वास्थ्य विभाग की टीम करेगी जांच: खाने-पीने की सामग्रियों के लिए जा रहे सैंपल
डॉक्टर नवीन कोठारी ने बीमारी के सटीक कारणों पर बात करते हुए कहा कि प्राथमिक लक्षणों को देखकर यह सीधे तौर पर गंभीर लू (Heatstroke) लगने का असर लग रहा है, लेकिन भोजन में गड़बड़ी या दूषित पानी पीने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्य खाद्य निरीक्षक (Food Inspector) डॉक्टर अमित गुप्ता को अपनी टीम के साथ तत्काल कैंप स्थल पर जाकर खाने-पीने की सामग्रियों और वाटर सोर्सेज की जांच करने तथा उनके वैज्ञानिक सैंपल लेने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही अस्पताल में भर्ती बच्चों के ईसीजी (ECG), सीरम इलेक्ट्रोलाइट्स, ब्लड और यूरिन टेस्ट कराए जा रहे हैं ताकि शरीर के अंदरूनी अंगों पर पड़े किसी भी दुष्प्रभाव का समय रहते पता लगाया जा सके। पूछताछ में बच्चों के अलग-अलग बयान आने के कारण सटीक वजह जांच रिपोर्ट के बाद ही साफ होगी।
📢 “एक हफ्ते तक राहत की उम्मीद नहीं, तुरंत समाप्त किया जाए कैंप”—सीएमएचओ ने एनसीसी अधिकारियों को दिया अहम सुझाव
जबलपुर में मौसम के बेहद आक्रामक रुख और अगले एक सप्ताह तक लू व भीषण गर्मी से राहत मिलने की कोई संभावना न होने को देखते हुए सीएमएचओ डॉ. नवीन कोठारी ने एनसीसी के उच्च अधिकारियों को एक बड़ा और महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस जानलेवा मौसम को देखते हुए एनसीसी कैंप को फिलहाल तुरंत प्रभाव से समाप्त कर देना चाहिए, क्योंकि ऐसी स्थिति में कठिन ट्रेनिंग से बच्चों का मनोबल प्रभावित होता है और बीमार बच्चों को देखकर कैंप में मौजूद अन्य स्वस्थ बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर पड़ता है।
घटना की जानकारी मिलते ही एनसीसी के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें विक्टोरिया अस्पताल पहुंच गईं। बीमार बच्चों के डरे हुए परिजनों को भी फोन पर सूचना दे दी गई है और पूरे मामले की प्रशासनिक जांच शुरू कर दी गई है।