MP Rajya Sabha Election: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की रणभेरी; तीसरी सीट पर उलझा कांग्रेस का सियासी गणित
भोपाल: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी होने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दल अपनी-अपनी गोटियां सेट करने में पूरी तरह जुट गए हैं। जून 2026 में प्रदेश कोटे की रिक्त हो रही तीन राज्यसभा सीटों में से दो सीटें तो विधानसभा के वर्तमान संख्या बल के हिसाब से निर्विवाद रूप से भाजपा के खाते में जा रही हैं। लेकिन, कांग्रेस की मानी जाने वाली तीसरी सीट पर सूबे का सियासी अंकगणित अचानक बनता और बिगड़ता हुआ दिखाई दे रहा है, जिसने विपक्षी खेमे की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यदि कांग्रेस विधायकों ने जरा सी भी भीतरघात या क्रॉस वोटिंग (Cross Voting) की, तो सुरक्षित मानी जा रही यह तीसरी सीट भी आसानी से उसके हाथों से फिसल सकती है। दिलचस्प बात यह है कि इसी तीसरी सीट पर कांग्रेस साल 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव लड़वाना चाहती थी, क्योंकि संख्या बल के हिसाब से तब तत्कालीन सत्ताधारी कांग्रेस केवल एक सीट ही आसानी से जीत रही थी, जिस पर दिग्विजय सिंह का नाम पार्टी आलाकमान ने फाइनल कर दिया था। कांग्रेस दूसरी सीट से सिंधिया को मैदान में उतारना चाहती थी ताकि यदि हार भी मिले तो उसका ठीकरा सिंधिया के सिर फूटे। यही मुख्य वजह थी कि मार्च 2020 में राज्यसभा चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस की कमल नाथ सरकार गिर गई और 22 विधायकों के बगावत करने से सारे समीकरण भाजपा के पक्ष में चले गए थे।
📊 कांग्रेस के पास बचे हैं सिर्फ 62 वोट: राजेंद्र भारती, मुकेश मल्होत्रा और निर्मला सप्रे के मामलों से घटा संख्या बल
अब एक बार फिर वर्तमान दौर में कांग्रेस के सामने अपने विधायकों को एकजुट और सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। कांग्रेस की इसी अंदरूनी कमजोरी और गुटबाजी का फायदा उठाकर भाजपा रणनीतिक रूप से तीसरी सीट पर भी अपना अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने की गुप्त योजना बना रही है। इधर कांग्रेस के गलियारों में फिलहाल उम्मीदवार के तौर पर पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन व पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ सहित कुछ अन्य बड़े नाम रेस में चर्चा में चल रहे हैं। लेकिन, भाजपा के आक्रामक तेवरों और रणनीति को भांपते हुए कांग्रेस इस बार किसी बड़े आदिवासी या दलित चेहरे को मौका देकर डैमेज कंट्रोल करने का दांव खेल सकती है।
यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो कांग्रेस के लिए बेहद आसान मानी जाने वाली राज्यसभा की इस तीसरी सीट का सियासी गणित इस बार काफी उलझ गया है। दतिया विधानसभा सीट से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद 230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायकों की कुल संख्या घटकर 64 रह गई है। इसके अलावा, विजयपुर सीट से विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान करने पर माननीय कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा रखी है। वहीं, बीना सीट से विधायक निर्मला सप्रे के पाला बदलने (दलबदल) का मामला विधानसभा अध्यक्ष के पास लंबित होने के कारण कानूनी तौर पर कांग्रेस के पास अब केवल 62 एक्टिव वोट ही बचे हैं।
⚖️ एक राज्यसभा सीट को जीतने के लिए चाहिए 58 वोट: पार्टी के भीतर का असंतोष बढ़ा सकता है आलाकमान की मुश्किलें
राज्यसभा की एक सीट को अपने पाले में करने के लिए प्रथम वरीयता के न्यूनतम 58 वोटों की कानूनी जरूरत होती है। हालांकि तकनीकी तौर पर अभी यह जादुई आंकड़ा (62 वोट) कांग्रेस के पास सुरक्षित दिखाई दे रहा है, लेकिन पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहा असंतोष और संभावित क्रॉस वोटिंग (Cross Voting) कभी भी उसकी मुश्किलें बढ़ा सकती है। यदि भाजपा इस सीट पर अपना तीसरा प्रत्याशी मैदान में उतारकर दांव खेलती है, तो कांग्रेस के कुछ नाराज आदिवासी विधायकों का मौन या खुला समर्थन भी सत्ताधारी दल को मिलने की प्रबल संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जो विपक्ष के लिए आत्मघाती साबित होगा।
🏹 बीजेपी के पास मौजूद हैं 164 विधायकों का भारी बहुमत: दो सीटें जीतने के बाद भी बचेंगे 48 सरप्लस वोट
वहीं दूसरी तरफ, सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास वर्तमान में 164 विधायकों का भारी-भरकम बहुमत मौजूद है। यानी अपनी पहली दो सीटों को बेहद आसानी से जीतने के बाद भी बीजेपी के पास करीब 48 सरप्लस (अतिरिक्त) वोट सुरक्षित बचेंगे। ऐसे में यदि मतदान के दिन कांग्रेस के खेमे में गुटबाजी के चलते क्रॉस वोटिंग होती है और बीजेपी को कुछ अन्य निर्दलीय या विपक्षी विधायकों का अतिरिक्त समर्थन मिल जाता है, तो भाजपा इतिहास दोहराते हुए तीसरी सीट पर भी सर्जिकल स्ट्राइक कर शानदार जीत दर्ज कर सकती है। यही वजह है कि दोनों ही खेमों में विधायकों की बाड़ेबंदी और मान-मनौव्वल का दौर शुरू हो गया है।