MP High Court: मध्य प्रदेश में बंद चेक पोस्ट खोलने के आदेश पर हाई कोर्ट की रोक, ट्रांसपोर्टरों को राहत
जबलपुर। हाई कोर्ट ने प्रदेश की सीमाओं पर बंद की गईं सभी अंतर्राज्यीय चेक पोस्ट को खोलने के पूर्व आदेश पर रोक लगा दी है। यह आदेश सोमवार को भोपाल के एक ट्रांसपोर्टर की पुनरीक्षण याचिका पर सुनाया गया।
🚛 ओवरलोडिंग और खराब सड़कों का था मुख्य मुद्दा
उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता सतना निवासी रजनीश त्रिपाठी की ओर से अधिवक्ता जुबिन प्रसाद व भानु प्रकाश विश्वकर्मा ने दलील दी थी कि पूर्व में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। उसमें आरोप था कि ओवरलोडिंग ट्रकों व अन्य वाहनों के चलते सबसे ज्यादा सड़कें खराब होती हैं।
💰 1050 करोड़ का निवेश और चेक पोस्ट बंद करने का विवाद
इस मामले में सरकार ने हाई कोर्ट में अंडरटेकिंग दी थी कि ओवरलोडिंग रोकने हर संभव प्रयास किया जाएगा। याचिका लंबित रहने के दौरान राज्य शासन ने 1050 करोड़ रुपये का निवेश करके विभिन्न बार्डर क्षेत्रों में 19 चेक पोस्ट खोली थीं। बंद चेकपोस्ट खोलने की राज्य शासन की अंडरटेकिंग पर हाई कोर्ट ने मामले का निराकरण कर दिया था। अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया था कि अगले वर्ष यानी 2024 में ही सरकार ने उक्त सभी चेक पोस्ट को बंद कर दिया।
🛣️ बिना चेकिंग ओवरलोड वाहनों से सड़कों और खजाने को नुकसान
अब बिना चेकिंग के ही ओवरलोड वाहन अन्य राज्यों से मध्य प्रदेश में आते हैं, जिससे सड़कें खराब होती हैं। इसके लिए विधानसभा से अनुमति नहीं ली गई और न ही कोई अधिसूचना जारी की गई। सरकारी खजाने को भी बहुत नुकसान हो रहा है।
😌 हाई कोर्ट के फैसले से ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों को मिली राहत
बहरहाल, सोमवार को कोर्ट ने प्रदेश भर में बंद पड़े परिवहन चेक पोस्टों को दोबारा शुरू करने के अपने पूर्व आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस अहम फैसले से ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों को बड़ी राहत मिली है।
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