MPEB के सहारे साजिश या,खुद MPEB की नाकामयाबी,लेकिन सवाल यह कि जनता से TEX का वसूला पैसा मेंटनेंस के नाम पर जा किसकी जेब में रहा,,,फिर दूसरी सबसे प्रबल संभावना कि कही मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव को दिग्विजय सिंह बनाने की तो, नहीं चल रही साजिश,बत्ती के मामले में जमकर बत्ती देने पर, आमदा मुख्यमंत्री यादव का विरोधी खेमा।
अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर
राजनीति में यह किसी से छुपा नहीं है कि यहां हर पग पर दोस्त से ज्यादा विरोधी या सीधे कहे कि दुश्मनों का ज्यादा डेरा है। रोजाना कहीं न कहीं सत्तारूढ़ दल की खींचतान को सीधे तौर पर, मुख्य चेहरे, यानी फिलहाल में काबिज मुख्यमंत्री को ही सहनी है। दरअसल फिलहाल प्रदेशभर में जो MPEB की लापरवाहियों को देखते हुए लग तो यही रहा है। या फिर MPEB ने ही चल रहा बहुत बड़ा झोल है। क्योंकि अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा सिर्फ नाम का काम बतलाकर,बिजली के नाम आम जनता का जमकर दम निकाला जा रहा है। इससे नाराज जनता अब सीधे तौर पर मुखिया को ही तो कोसेंगी ना। इस वक्त प्रदेशभर में मुख्यमंत्री मोहन यादव को जनता द्वारा जमकर कोसा जा रहा है। सोशल मीडिया पर यादव विरोधी खेमा मोहन सरकार की तुलना दिग्विजय सिंह की बत्ती के चक्कर में गई सरकार से कर रहे है। लेकिन असल में,पर्दे के पीछे है कौन??? क्योंकि जब विपक्ष फिलहाल भाजपा सरकार के मामले में बोलकर चुपचाप हो जाता है तो। फिर मोहन सरकार के खिलाफ साजिश कौन कर रहा है। आज की स्थिति में बिजली की भी कमी नहीं है न ही पहले की अपेक्षा इतनी ज्यादा बिजली चोरी। ऐसे हालातों में भी MPEB की कटौती समझ से बाहर है। और परे इसलिए है क्योंकि जनता भी MPEB द्वारा जो बिजली बिल,सर्विस चार्ज,उपभोग बिजली,सरचार्ज तक पूरी ईमानदारी से जमा कर रही है। फिर भी कटौती, फिर क्यों कोई भी दिग्गी सरकार को याद क्यों नहीं करेगा। क्योंकि कटौती कायम है,बिजली आना जाना जारी है। घंटों तक बिजली गुल शहर का 90 प्रतिशत से ज्यादा एरिया अंधेरे में। समझ से बाहर ही जा रहा है। यह कहीं मोहन सरकार के खिलाफ सोची समझी साजिश तो नहीं। या भविष्य को लेकर और कोई नया इशारा। लेकिन कुछ भी क्यों न हो। मगर इस चक्की में सिर्फ जनता ही पीसा रही है।
