Wild Buffalo Attack: महुआ चुनने गई महिलाओं पर जंगली भैंस का जानलेवा हमला, दो की मौके पर मौत; इलाके में दहशत
लातेहार: पलामू टाइगर रिजर्व अंतर्गत लातेहार जिले के छिपादोहर पश्चिम वन क्षेत्र स्थित गुरीकरम जंगल में महुआ चुनने गई महिलाओं पर जंगली भैंस ने हमला कर दिया. इस घटना में दो महिलाओं की मौत हो गई. मृतकों की पहचान सिलमानिया देवी और शांति कुमारी के रूप में हुई है. दोनों मोरवाई गांव के रहने वाले थे. घटना के बाद वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंचकर पूरे मामले की छानबीन आरंभ कर दी है. मृतक के परिजनों को तत्काल 50-50 हजार रुपए मुआवजा दिया गया.
दरअसल गांव की कुछ महिलाएं सोमवार को महुआ चुनने के लिए गांव से थोड़ी दूर पर स्थित जंगल में सुबह-सुबह चली गई थी. इसी दौरान जंगल में अचानक जंगली भैंस के झुंड ने दो महिलाओं पर हमला कर दिया. जंगली भैंस ने दोनों महिलाओं को जंगल में ही पटक पटक कर मार डाला. इधर सोमवार को देर शाम तक जब महिलाएं वापस घर नहीं लौटी तो परिजन परेशान हो गए और महिलाओं को ढूंढने के लिए जंगल में गए. काफी खोजबीन करने के बाद भी महिलाओं का आता-पता नहीं चला. परिजन जब तक घटनास्थल पर पहुंचे दोनों महिलाओं की मौत हो गई थी.
सूचना मिलने के बाद पहुंचे वन विभाग के पदाधिकारी
इधर घटना की जानकारी मिलने के बाद मंगलवार को वन विभाग की टीम और स्थानीय जनप्रतिनिधि ने गांव पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी ली. इस संबंध में मुखिया आशीष सिंह चेरो ने बताया कि दोनों महिलाएं जंगल में महुआ चुनने के लिए गई थीं. लेकिन जंगली भैंस ने हमला कर दोनों को मार डाला. उन्होंने कहा कि वन विभाग से मुआवजा की मांग की जा रही है.
वहीं इस संबंध में फॉरेस्टर रजनीश कुमार ने कहा कि घटना की जानकारी मिलने के बाद पूरे मामले की छानबीन की जा रही है. महिलाओं के शव को पोस्टमार्टम के लिए लातेहार सदर अस्पताल भेजा जा रहा है. उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों को सरकारी प्रावधान के तहत मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा. तत्काल दोनों के परिजन को 50-50 हजार रुपए मुआवजे की राशि दी जा रही है. शेष राशि कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दी जाएगी.
ग्रामीण अपनी सुरक्षा का ध्यान रखें: फॉरेस्टर
इधर इस संबंध में फॉरेस्टर रजनीश कुमार ने आम लोगों से अपील की है कि जंगल में कभी भी अकेले या दो लोग ना जाएं. जंगल में तभी जाएं जब सवेरा हो जाए. धूप निकलने के बाद ही जंगल में जाना सुरक्षित होता है. उन्होंने कहा कि अगर जंगल में महुआ चुनने या फिर लकड़ी चुनने जाना हो तो ग्रामीण इकट्ठा होकर जाएं और उजाला रहते ही वापस लौट आएं.
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