रायपुर : नीट-यूजी 2026 परीक्षा में लगातार हो रही धांधली और पेपर लीक से स्तब्ध छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर कठोर कार्रवाई की मांग की है। छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने कहा कि एनटीए (NTA) की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। परीक्षा में गड़बड़ी की इन घटनाओं ने देश के लाखों छात्रों के भविष्य और उनके मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
⚠️ राष्ट्रीय परीक्षाओं में अनियमितता पर चिंता: एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल
छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी के संयोजक डॉक्टर कुलदीप सोलंकी ने आगे बताया कि जब अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं व्यवस्थित ढंग से आयोजित हो सकती हैं, तो नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में बार-बार अनियमितताएं सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल मेधावी छात्रों का मनोबल टूटता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली की साख भी खराब होती है।
💰 छात्रों के लिए मुआवजे की मांग: “दोषी अधिकारियों की संपत्ति नीलाम कर मिले हर्जाना”
परीक्षा में शामिल 22 लाख छात्रों को मानसिक तनाव और समय की क्षति के लिए मुआवजा देने की भी मांग उठाई गई है। छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी की मांग है कि प्रत्येक परीक्षार्थी को 1-1 लाख रुपये का हर्जाना मुहैया कराया जाए। संगठन का कहना है कि इस हर्जाने की भरपाई NTA के दोषी अधिकारियों एवं इस पूरे षडयंत्र में शामिल अपराधियों की व्यक्तिगत संपत्ति को नीलाम करके की जानी चाहिए ताकि भविष्य के लिए एक नजीर पेश हो सके।
🔄 नई पारदर्शी प्रणाली की आवश्यकता: साल में दो बार हो नीट परीक्षा
डॉ. सोलंकी ने वर्तमान एनटीए व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर एक नई पारदर्शी और सुरक्षित प्रणाली लागू करने की वकालत की है। उन्होंने सुझाव दिया कि छात्रों का शैक्षणिक वर्ष प्रभावित न हो, इसके लिए नीट परीक्षा वर्ष में दो बार आयोजित करने का स्थायी प्रावधान बनाया जाना चाहिए। इससे छात्रों पर दबाव कम होगा और तकनीकी त्रुटियों या धांधली की स्थिति में उनके पास वैकल्पिक अवसर मौजूद रहेगा।
⚖️ केंद्र सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की अपील: छात्रों का विश्वास बहाल करना जरूरी
सोसाइटी ने जोर देकर कहा कि परीक्षा प्रणाली में छात्रों और अभिभावकों का विश्वास बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार का त्वरित हस्तक्षेप अनिवार्य है। डॉ. कुलदीप सोलंकी ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री इस संवेदनशील मामले पर गंभीरता से विचार करेंगे और एनटीए के ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन सुनिश्चित करेंगे, ताकि भविष्य में होने वाली परीक्षाओं की सुचिता (Purity) बनी रहे।
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