Local & National News in Hindi
Logo
ब्रेकिंग
Most Expensive Tea: 1 किलो चाय की कीमत 9 करोड़ रुपये, लग्जरी कारों से भी महंगी इस चाय की खासियत जानि... Safest UPI App in India: भारत में कौन सा UPI पेमेंट ऐप है सबसे सुरक्षित? जानें सही जवाब PM Modi Somnath Visit: सोमनाथ मंदिर में पीएम मोदी ने किया कुंभाभिषेक, गूंजा 'हर-हर महादेव' Mandira Bedi Fitness: 54 की उम्र में भी कैसे इतनी फिट हैं मंदिरा बेदी? खुद बताया अपनी 'टोंड बॉडी' का... Toll Tax Rules: देश में खत्म होंगे टोल बैरियर, हाईवे पर 120 की स्पीड में कटेगा टैक्स; गुजरात से शुरु... Chhatrapati Sambhajinagar News: कुएं में मिट्टी धंसने से बड़ा हादसा, पानी निकालने गए पिता और 2 बेटों... Viral Wedding: विदेशी दुल्हन ने भारतीय रीति-रिवाज से लिए 7 फेरे, लंदन की लड़की बनी तेलंगाना की बहू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का फॉर्मूला: PM मोदी की अपील- छोटे-छोटे संकल्पों से देश की इकोनॉमी को मिल... Political Twist: BJP नेता के साथ हुआ 'खेला'! 8 दिन तक मनाया अध्यक्ष बनने का जश्न, बाद में आदेश निकला... Bhind Hospital News: भिंड जिला अस्पताल में गिरी वार्ड की सीलिंग; 3 महिलाएं और एक नवजात घायल, अस्पताल...

Political Twist: BJP नेता के साथ हुआ ‘खेला’! 8 दिन तक मनाया अध्यक्ष बनने का जश्न, बाद में आदेश निकला फर्जी

50

भोपाल: मध्यप्रदेश की राजनीति इन दिनों राजनीतिक नियुक्तियों के दौर से गुजर रही है। रोज़ किसी न किसी बोर्ड, निगम और प्राधिकरण में नई नियुक्तियों की चर्चाएं हैं। ऐसे माहौल में सत्ता के गलियारों में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने न सिर्फ प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल खड़े किए, बल्कि राजनीतिक उत्साह की हकीकत भी उजागर कर दी।

सिंगरौली विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता वीरेंद्र गोयल सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित नियुक्ति आदेश को सच मान बैठे। आदेश में उन्हें दोबारा अध्यक्ष बनाए जाने की बात लिखी थी। बस फिर क्या था—बधाइयों का दौर शुरू हो गया। गोयल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष से लेकर उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल तक से मुलाकात कर शुभकामनाएं लेते रहे। मिठाइयां बंटी, समर्थकों ने जश्न मनाया, फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे।

हैरानी की बात यह रही कि यह पूरा राजनीतिक उत्सव करीब आठ दिनों तक चलता रहा और किसी स्तर पर इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। सत्ता के करीब रहने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी वायरल आदेश को ही अंतिम सत्य मान लिया।

मामले ने मोड़ तब लिया, जब नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे के संज्ञान में यह घटनाक्रम आया। विभागीय जांच में साफ हुआ कि ऐसा कोई आदेश जारी ही नहीं हुआ था। यानी जिस नियुक्ति पर नेता जी जश्न मना रहे थे, वह पूरी तरह फर्जी निकली।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

Don`t copy text!