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ईरान का सबसे बड़ा पलटवार! अमेरिका का ‘Eye in the Sky’ विमान हुआ राख, 5800 करोड़ का नुकसान; जानें क्यों खास है E-3 सेंट्री

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मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच ईरान ने बड़ा दावा किया है. उसने कहा कि उसने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर हमला कर अमेरिकी के E-3 सेंट्री विमान (E-3 AWACS) को भारी नुकसान पहुंचाया. प्रिंस सुल्तान एयरबेस का इस्तेमाल अमेरिका करता है. ईरान के मुताबिक, इस हमले में 6 बैलिस्टिक मिसाइल और 29 ड्रोन इस्तेमाल किए गए. बोइंग के E-3 सेंट्री विमान का इस्तेमाल कमांड और कंट्रोल के लिए इस्तेमाल होता है. एक E-3 सेंट्री विमान की कीमत लगभग ₹4,100 करोड़ से लेकर ₹5,800 करोड़ तक हो सकती है.

ईरानी मीडिया ने जो तस्वीरें जारी की हैं, उनमें विमान बुरी तरह टूटा हुआ दिख रहा है और उसका बड़ा हिस्सा नष्ट हो चुका है. रिपोर्ट्स के अनुसार, 27 मार्च को हुए हमले में कम से कम 10 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें 2 की हालत गंभीर है. इसके अलावा कुछ फ्यूल भरने वाले विमान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं. हालांकि इस मामले पर US सेंट्रल कमांड CENTCOM) ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

अमेरिका के पास 16 E-3 विमान

अमेरिका के पास E-3 विमान पुराने और सीमित संख्या में हैं. अब सिर्फ 16 विमान ही बचे हैं, जो पहले की तुलना में आधे हैं. 16 में से 6 विमान यूरोप और मिडिल ईस्ट में तैनात किए हैं. E-3 विमान हवा और जमीन की निगरानी और कमांड-कंट्रोल का काम करते हैं. इनके इंजन और एयरक्राफ्ट पुराने हैं और रखरखाव कठिन है. सभी विमान हर समय मिशन के लिए तैयार नहीं होते. 2024 में इनके मिशन रेडी होने की दर लगभग 55% थी.

उड़ता हुआ रडार स्टेशन है E-3

E-3 को उड़ता हुआ रडार स्टेशन कहा जाता है. इसके ऊपर एक बड़ा घूमता हुआ रडार डोम है. इसमें 13 से 19 एक्सपर्ट्स और 4 क्रू मेंबर्स होते हैं. यह विमान दुश्मन और मित्र विमानों, नौसेना और अन्य गतिविधियों को ट्रैक करता है. यह सिर्फ हवाई क्षेत्र ही नहीं, बल्कि युद्ध के समय भी कमांड और कंट्रोल का काम करता है. किसी हमले की स्थिति में यह विमान जरूरी जानकारी देता है.

ईरान का MQ-9 ड्रोन और F-16 गिराने का दावा

ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसकी इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने लंबी और मध्यम दूरी की मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया. साथ ही उसने कहा कि उसने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया और एक F-16 फाइटर जेट को भी निशाना बनाया.

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब 28 फरवरी से शुरू हुआ युद्ध अब दूसरे महीने में पहुंच चुका है और लगातार बढ़ रहा है. युद्ध अब और फैलता जा रहा है. हूती विद्रोहियों ने भी इजराइल पर मिसाइल दागी हैं. वहीं ईरान ने इजराइल और अमेरिका के शैक्षणिक संस्थानों पर हमले की धमकी दी है.

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