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Indore Honeytrap Case: इंदौर में शराब कारोबारी से ₹1 करोड़ की वसूली; 2019 कांड की मास्टरमाइंड श्वेता जैन फिर गिरफ्तार

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इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में शराब कारोबारी हितेंद्रसिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर (बाणगंगा) को जाल में फंसाकर एक करोड़ रुपये वसूलने वाले हाई-प्रोफाइल गिरोह ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे गिरोह की मुख्य मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि भोपाल की श्वेता विजय जैन है। श्वेता वही आरोपी है जो साल 2019 में मध्य प्रदेश के चर्चित हनीट्रैप कांड में नगर निगम के तत्कालीन इंजीनियर हरभजनसिंह को ब्लैकमेल करने के आरोप में जेल जा चुकी है। पुलिस के अनुसार, श्वेता जैन और अलका दीक्षित (शराब तस्कर) की मुलाकात इंदौर की जिला जेल में हुई थी, जहां से इस नए सिंडिकेट की पटकथा लिखी गई। जमानत पर बाहर आने के बाद दोनों ने मिलकर रसूखदारों को हनीट्रैप में फंसा कर मोटी वसूली शुरू कर दी। यह गैंग पिछले दो साल से सक्रिय है और कई बड़े नेताओं व कारोबारियों को अपना शिकार बना चुकी है, हालांकि बदनामी के डर से कई पीड़ित अब तक सामने नहीं आ रहे हैं।

⚖️ कोर्ट ने श्वेता जैन और अलका दीक्षित सहित 5 आरोपियों को 6 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा: जेल की दोस्ती से शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का खेल

डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP अपराध) राजेश त्रिपाठी के अनुसार, मंगलवार दोपहर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए श्वेता जैन (भोपाल), अलका दीक्षित (द्वारकापुरी, इंदौर), जयदीप दीक्षित (द्वारकापुरी), लाखन चौधरी (खंडवा/पीथमपुर) और जितेंद्र पुरोहित (देवास) को जिला न्यायालय में पेश किया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और कड़ियों को जोड़ने के लिए सभी आरोपियों को छह दिन की पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है। मुख्य आरोपी श्वेता ने पूछताछ में कुबूल किया कि 2019 के हनीट्रैप केस के दौरान वह श्वेता स्वप्निल जैन (भोपाल) के साथ जिला जेल में बंद थी। उसी दौरान अवैध शराब तस्करी के केस में बंद अलका दीक्षित भी उनके संपर्क में आई। दोनों की जेल में गहरी दोस्ती हो गई और जमानत मिलने के बाद भी वे लगातार टच में रहीं। अलका पहले से ही अनैतिक गतिविधियों में शामिल थी, जिसने बाहर आते ही श्वेता के इशारे पर अमीर लोगों को टारगेट करना और उनसे मोटी रकम वसूलना शुरू कर दिया। जांच अधिकारियों के मुताबिक, श्वेता के निशाने पर कुछ ऐसे राजनेता और उद्योगपति भी हैं जो 2019 के कांड में बाल-बाल बच गए थे।

📱 पुलिसकर्मी से ब्लैकमेलिंग के टिप्स ले रही थी तस्कर अलका: बीजेपी पदाधिकारी और तथाकथित पत्रकार भी साजिश में शामिल

डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने गिरोह के अन्य नेटवर्क का खुलासा करते हुए बताया कि गिरफ्तार किया गया आरोपी लाखन चौधरी मूल रूप से खंडवा (वर्तमान निवासी पीथमपुर) का है और खुद को बीजेपी (भाजपा) का पदाधिकारी बताता है। लाखन पिछले दो साल से अलका के सीधे संपर्क में था और प्रॉपर्टी डीलिंग की आड़ में गिरोह के लिए अमीर शिकार तलाशने का काम करता था। चिंटू ठाकुर को जाल में फंसाने के बाद अलका ने पुलिस विभाग के इंटेलिजेंस (खुफिया विंग) में पदस्थ प्रधान आरक्षक (Head Constable) विनोद शर्मा से भी कानूनी कार्रवाई से बचने और ब्लैकमेलिंग को पुख्ता करने की सलाह ली थी, यहाँ तक कि उसके साथ पीड़ितों के फोटो भी साझा किए थे। विभागीय पूछताछ में विनोद ने अलका से संपर्क होने की बात स्वीकार कर ली है। इसी तरह देवास का जितेंद्र पुरोहित भी अलका के संपर्क में था। खुद को मीडियाकर्मी बताने वाले जितेंद्र ने अलका को हनीट्रैप के पीड़ितों से कानूनी पचड़ों का डर दिखाकर रुपये वसूलने के नए-नए तरीके बताए थे और वह भी इस पूरी आपराधिक साजिश में बराबर का हिस्सेदार बन गया था। पुलिस अब इन सभी के कॉल डिटेल्स और बैंक खातों की जांच कर रही है।

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