Jharkhand Fuel Crisis: अमेरिका-ईरान युद्ध का असर, झारखंड में पेट्रोल-डीजल की किल्लत; पीएम की अपील पर सियासत तेज
रांची: अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ईंधन बाजार में आई भारी अस्थिरता का असर अब भारत के छोटे राज्यों तक पहुंचने लगा है। झारखंड में पेट्रोल-डीजल की किल्लत दिखनी शुरू हो गई है, जबकि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। वैश्विक संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईंधन बचत की अपील की है, जिसमें पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल, अनावश्यक यात्राओं से बचना और खपत कम करने जैसे सुझाव शामिल हैं।
⚖️ सुदिव्य कुमार का पलटवार: पीएम के आह्वान को बताया “राजनीतिक ढकोसला”
ईंधन की बचत करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद हॉर्मुज स्ट्रेट के प्रभावित होने से तेल की कीमतें बढ़ना तय था, लेकिन चुनाव के दौरान इस मुद्दे को छिपाया गया। उन्होंने केंद्र पर अग्रिम तैयारी न करने का आरोप लगाया, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि भारत एक मजबूत राष्ट्र है और इस झटके से भी उबर जाएगा।
🚗 राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री की पहल: काफिले में वाहनों की संख्या घटाई
प्रधानमंत्री के आह्वान पर अमल करते हुए झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने ईंधन बचत के लिए अपने कारकेड में सिर्फ चार गाड़ियां रखने की घोषणा की है। वहीं, केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने केवल एक गाड़ी रखने का फैसला लिया है। दोनों नेताओं ने संदेश दिया है कि संकट के समय प्रतीकात्मक कदम उठाना आवश्यक है ताकि जनता में जागरूकता आए।
💼 चैंबर ऑफ कॉमर्स की मांग: राज्य सरकार जारी करे ठोस गाइडलाइंस
झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने प्रधानमंत्री के आह्वान का स्वागत किया है। चैंबर अध्यक्ष आदित्य मलहोत्रा ने राज्य सरकार से भी ईंधन बचत के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ईंधन आयात से विदेशी मुद्रा भंडार पर 60-70 हजार करोड़ रुपये का दबाव पड़ा है। उन्होंने अनुमान लगाया कि सामूहिक प्रयासों से 30 प्रतिशत तक ईंधन खपत कम की जा सकती है। पूर्व चैंबर अध्यक्ष किशोर मंत्री ने भी नागरिकों से इस मुहिम में जुड़ने की अपील की।
📋 सीएम के लौटने का इंतजार: झारखंड में जल्द बड़े फैसले की उम्मीद
वर्तमान हालात से निपटने के लिए झारखंड सरकार तैयारी में जुट गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन फिलहाल राज्य के बाहर हैं, इसलिए कोई बड़ा नीतिगत फैसला अभी नहीं लिया गया है। उम्मीद है कि सीएम के लौटते ही ईंधन खपत कम करने, स्कूलों में ऑनलाइन क्लासेस बढ़ाने और अन्य वैकल्पिक उपायों पर दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। कई अन्य राज्यों में पहले ही ऐसी गाइडलाइंस लागू की जा चुकी हैं।
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