INDORE नगर निगम झेल रहा फिजूलखर्ची की मार,चाहिए हर महीने 131 करोड़,लगातार बढ़ते खर्च का ऑडिट रिपोर्ट में हुआ खुलासा,स्थापना विभाग ने सभी विभागों को जारी किया पत्र,कैसे कम किया जाए फिजूल खर्च!
निगम को चाहिए हर महीने खर्च के 131 करोड़,मेयर पद बस नाम का, स्थापना विभाग ने ऑडिट रिपोर्ट के बाद मांगा सभी विभागों से जवाब कैसे कम की जाए फिजूलखर्ची।

✍️अमित कुमार त्रिवेदी पत्रकार इंदौर
एक तरफ देश में ईंधन को लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगो से फिजूलखर्ची, और उन्हें रोकने की अपील कर रहे हैं। जबकि देश का नंबर एक इंदौर नगर निगम प्रतिमाह 131 करोड़ प्रतिमाह के खर्च को कम करने के लिए जूझ रहा हैं। क्योंकि आधिकारिक रूप से दी गई जानकारी की बात करे तो इंदौर नगर निगम के जितने भी वाहन सड़कों पर दौड़ रहे है उनके डीजल पेट्रोल का खर्च ही प्रतिमाह 10 करोड़ से ज्यादा का हैं। वहीं दूसरी तरफ लिए गए लोन पर प्रतिमाह की EMI 18 करोड़ और तमाम ग्रीन ब्रांड जारी करने सोलर प्लांट शुरू करने के बावजूद भी इंदौर नगर निगम को प्रतिमाह 15 करोड़ रुपए बिजली बिल का भुगतान करना पड़ रहा हैं। इधर हर महीने कर्मचारियों अधिकारियों की सेलरी और पेंशन पर 78 करोड़ रुपए प्रतिमाह का खर्च सो अलग। लिहाजा अब इंदौर नगर निगम के स्थापना विभाग ने निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल के आदेशानुसार अब हर विभाग को पत्र जारी करते हुए फिजूलखर्ची को चिन्हित करने और उनकी रोकथाम के लिए सुझाव मांगे हैं। जबकि उक्त मामले में इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ग्रीन ब्रांड के जरिए भले प्रतिमाह निगम को अतिरिक्त पांच करोड़ रुपए महीना लाभ होने की बातें कर रहे है लेकिन असल हकीकत यह है कि फिलहाल इंदौर नगर निगम फिजूलखर्ची की जमकर मार झेल रहा हैं।


सात दिनों बाद खुद कमिश्नर करेंगे समीक्षा।

चर्चा में स्थापना विभाग के अपर आयुक्त मनोज पाठक ने बताया कि ऑडिट रिपोर्ट जो कि भोपाल से करवाया गया था। उसमें इंदौर नगर निगम में प्रतिमाह 131 करोड़ के खर्च का मामला सामने आया हैं। लिहाजा उन्होंने निगम के सभी विभागों को पत्र जारी कर दिया हैं। जिनका जवाब अगले सात दिनों में आने वाला हैं। अपर आयुक्त मनोज पाठक ने बताया कि जवाब आने के बाद इंदौर नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल उक्त मामले में समीक्षा करते हुए आगे कोई निर्णय लेंगे। फिलहाल स्थापना विभाग अन्य विभागों के जवाब का इंतजार कर रहा हैं।