Bandhavgarh Tiger Reserve: बांधवगढ़ में बाघ शावक की मौत, आपसी संघर्ष या शिकार? वन विभाग ने शुरू की हाई-लेवल जांच
मैहर/पन्ना/मंडला : महाराजा मार्तण्ड सिंह जूदेव व्हाइट टाइगर सफारी एंड जू मुकुंदपुर में उपचार के दौरान घायल बाघ के शावक की मौत हो गई. ये बाघ 19 अप्रैल को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला वन परिक्षेत्र के भद्रशिला बीट से गंभीर हालत में रेस्क्यू कर लाया गया था. रेस्क्यू के समय उसकी हालत बेहद नाजुक थी. करीब 6 माह के इस नर शावक के दोनों दाहिने पैरों में गहरे घाव थे. इसके अलावा शरीर के कई हिस्सों पीठ, पेट और गर्दन के आसपास दांतों के निशान पाए गए.
आइसोलेशन में रखकर चला बाघ का इलाज
प्रारंभिक जांच में यह संभावना जताई गई कि शावक पर किसी अन्य जंगली जानवर, संभवतः वयस्क बाघ ने हमला किया. रेस्क्यू के बाद शावक को तत्काल मुकुंदपुर सफारी लाया गया, जहां वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की टीम ने उसका इलाज शुरू किया. शावक को आइसोलेशन में रखकर एंटीबायोटिक दवाएं दी गईं, फ्लूइड थेरेपी शुरू की गई और घावों की नियमित ड्रेसिंग की गई. उसकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही थी, लेकिन आंतरिक चोटें काफी गंभीर थीं.
वन अधिकारियों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार
लगातार प्रयासों के बावजूद बाघ की हालत में सुधार नहीं हो पाया और 21 अप्रैल की सुबह करीब 6:05 बजे उसने दम तोड़ दिया. चिकित्सकों के अनुसार अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव और गंभीर ट्रॉमा उसकी मौत की मुख्य वजह रहे. डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया और जांच के लिए आवश्यक सैंपल सुरक्षित किए. इसके बाद मुख्य वन संरक्षक रीवा राजेश कुमार राय, वनमंडलाधिकारी मैहर विद्याभूषण मिश्रा और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में शावक का अंतिम संस्कार किया गया.
मौत कैसे हुई, जांच में जुटा वन विभाग
वन विभाग अब मामले की जांच कर रहा है. पता लगाया जा रहा है कि बाघ शावक अपनी मां से अलग कैसे हुआ और उस पर हमला किन परिस्थितियों में हुआ. विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला बाघों के बीच क्षेत्रीय संघर्ष से जुड़ा हो सकता है. डीएफओ विद्या भूषण मिश्रा ने बताया “बांधवगढ़ के ताला जोन के भद्रशीला में शावक घायल अवस्था में पाया गया, जिसके बाद उस शावक का इलाज बांधवगढ़ में भी चला और फिर मैहर जिले के मुकुंदपुर में इलाज के लिए लाया गया. इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई है.”
पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ का कंकाल मिला
पन्ना टाइगर रिजर्व के ग्राम हिनौता मझगांव मुख्य रास्ते से 100 मीटर दूरी पर बाघ का कंकाल मिला. बाघ मृत्यु 25 दिन पूर्व बताई जा रही. पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार स्थानीय ग्रामीण द्वारा महुआ बीनने के दौरान बाघ का कंकाल दिखाई दिया. पन्ना टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर बृजेश श्रीवास्तव ने बताया “एसटीएफ (STF) टीम द्वारा जांच कराई जा रही है. सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी.”
कान्हा नेशनल पार्क में भी नर बाघ शावक का शव मिला
कान्हा नेशनल पार्क क़े सरही जोन क़े सरहीनकान बीट मे एक नर बाघ शावक का शव मिला है. जांच मे पाया गया कि उसके सभी अंग सुरक्षित हैं. प्रथम दृष्टया उसकी मौत का कारण स्वाभाविक माना जा रहा है. मौके पर आस पास मादा बाघ अपने बच्चो क़े साथ देखी गई. इस नर बाघ शावक को कान्हा प्रबंधन की टीम दो दिन से ढूंढ़ रही थी. ये नर बाघ शावक कमजोर था औऱ उसका पेट भी खाली था. कान्हा टाइगर रिजर्व बफर जोन की उपसंचालक अमिता के बी ने बताया “दो दिन से इस शावक को ढूंढ रहे थे. शावक की बॉडी मिली तो उसके मादा बाघिन और शावक भी पास में ही मौजूद थे.
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