Ujjain Mahakal Update: उज्जैन महाकाल मंदिर में विशेष परंपरा; भोलेनाथ को ठंडक देने के लिए शिवलिंग पर प्रवाहित होगी जलधारा
उज्जैन। वैशाख व ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में भगवान महाकाल को ठंडक प्रदान करने के लिए उनके शीश मिट्टी की मटिकयों में जल भरकर शीतल जलधारा प्रवाहित की जाएगी। मटकियों के माध्यम से जल अर्पण की इस परंपरा को गलंतिका बंधन कहा जाता है। महाकाल मंदिर में गलंतिका बांधने का क्रम 3 अप्रैल से 30 मई तक दो माह चलेगा।
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से ज्येष्ठ पूर्णिमा तक पूरे दो माह गलंतिका बांधी जाती है। इस बार गलंतिका बांधने की शुरुआत वैशाख कृष्ण प्रतिपदा पर 3 अप्रैल से होगी। पुजारी पवित्र नदियों के नाम से उनका आह्वान पूजन कर भगवान के शीश गलंतिका बांधेंगे। इसके बाद शाम 4 बजे तक शीतल जल अर्पण होगा। मटकियों के माध्यम से जल अर्पण का क्रम निर्धारित समय पर पूरे दो माह तक चलेगा।
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