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JTET Language Controversy: झारखंड में जेटेट भाषा विवाद गहराया; पांच मंत्रियों की कमेटी गठित, जानें JMM, कांग्रेस और RJD का स्टैंड

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रांची: झारखंड में जेटेट (JTET) नियमावली 2026 में क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं की आधिकारिक सूची से अंगिका, भोजपुरी और मगही को बाहर किए जाने के बाद से राज्य की राजनीति में भाषा विवाद एक बार फिर पूरी तरह से गहरा गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने ‘जेटेट भाषा विवाद’ को समय रहते सुलझाने और इसका सर्वमान्य समाधान निकालने के लिए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के नेतृत्व में पांच कैबिनेट मंत्रियों की एक उच्च स्तरीय विशेष कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में संयोजक राधाकृष्ण किशोर के साथ मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव, योगेंद्र प्रसाद और सुदिव्य कुमार को शामिल किया गया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है ताकि आगामी परीक्षाओं में किसी भी वर्ग के छात्रों का अहित न हो।

📊 महागठबंधन के तीनों दलों में वैचारिक मतभेद उजागर: जानिए झामुमो, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल का इस ज्वलंत मुद्दे पर क्या है स्टैंड?

इस नवगठित विशेष कमेटी की पहली औपचारिक बैठक संपन्न हो चुकी है। कमेटी के संयोजक ने इस ज्वलंत और संवेदनशील मुद्दे पर राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों से भी अपनी-अपनी पार्टी का आधिकारिक स्टैंड लिखित में स्पष्ट करने की कोशिश की है। ऐसे में जब झारखंड के सत्तारूढ़ महागठबंधन के मुख्य तीन दलों—झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), कांग्रेस (Congress) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के रुख का बारीकी से आकलन किया गया, तो स्पष्ट वैचारिक अंतर सामने आया है। जहां एक ओर झामुमो का स्पष्ट झुकाव स्थानीय जनजातीय और मूलवासियों को ही प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने की ओर है; वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल जनजातीय भाषाओं के सम्मान के साथ-साथ भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी लोकभाषाओं को बोलने वाले छात्रों को भी शिक्षक भर्ती परीक्षा में समान अवसर देने के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

🧑 झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय का बड़ा बयान: स्थानीय और मूलवासी युवाओं को ही मिलना चाहिए रोजगार में 100% मौका

जेटेट भाषा विवाद पर पार्टी की नीति स्पष्ट करते हुए झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि फिलहाल हमारी पार्टी का अडिग निर्णय है कि झारखंड की मिट्टी से जुड़ी स्थानीय और जनजातीय भाषाओं को बोलने वाले युवाओं को ज्यादा से ज्यादा मौका मिलना चाहिए, ताकि यहाँ के मूल निवासी युवा प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो सकें। मनोज पांडेय ने कहा कि पार्टी तो सैद्धांतिक रूप से चाहती है कि झारखंड की सभी सरकारी नौकरियों में 100% अवसर केवल और केवल स्थानीय और मूलवासियों को ही मिले। झामुमो हमेशा से झारखंड और झारखंडवासियों के जल, जंगल, जमीन और उनके भाषाई हितों की रक्षा के लिए सबसे आगे खड़ी रही है और इस नीति से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

⚖️ किसी भी भाषा का अपमान करने का अधिकार किसी को नहीं: झारखंड कांग्रेस प्रवक्ता कमल ठाकुर ने उठाई क्षेत्रीय दर्जे की मांग

दूसरी तरफ, झारखंड कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता कमल ठाकुर ने जेटेट भाषा विवाद पर अपनी सहयोगी पार्टी से अलग रुख अपनाते हुए कहा कि राज्य में जिन भाषाभाषियों की आबादी भारी संख्या में है और जो भाषाएं विभिन्न जिलों में सदियों से बोली जा रही हैं, उनका सरकारी स्तर पर पूरा सम्मान होना चाहिए। कमल ठाकुर ने आगे कहा कि किसी भी भाषा का अपमान या उसकी उपेक्षा करने का अधिकार किसी को भी नहीं है। जिसकी जहां जनसांख्यिकी है, उसको वहां की क्षेत्रीय भाषा का आधिकारिक दर्जा दिया जाना चाहिए। उन्होंने भौगोलिक उदाहरण देते हुए बताया कि पलामू, गढ़वा और लातेहार जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर भोजपुरी बोली जाती है, वहीं पूरे संथाल परगना क्षेत्र में अंगिका का प्रभाव है। ऐसे में इन भाषाओं को बोलने वाले लाखों युवाओं के साथ परीक्षा प्रणाली में नाइंसाफी कैसे की जा सकती है? जो पार्टी सबको साथ लेकर चलती है, वही जनता का विश्वास जीतती है।

🔥 ‘जब ओड़िया और बांग्ला को जगह मिली, तो मगही-अंगिका से नफरत क्यों?’: झारखंड राजद प्रवक्ता कैलाश यादव की अफसरों को फटकार

जेटेट भाषा विवाद पर सबसे तीखा रुख अख्तियार करते हुए झारखंड राजद के मुख्य प्रवक्ता कैलाश यादव ने कहा कि जेटेट परीक्षा नियमावली की सूची से भोजपुरी, मगही और अंगिका को बाहर का रास्ता दिखाना पूरी तरह से अनुचित और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में शीर्ष प्रशासनिक पदों पर बैठे कुछ पदाधिकारियों की सोची-समझी कारिस्तानी और गलत फीडबैक की वजह से ही झारखंड में यह अनावश्यक भाषा विवाद दोबारा भड़का है। कैलाश यादव ने सवाल उठाया कि जब राज्य की जेटेट नियमावली में पड़ोसी राज्यों की ओड़िया और बांग्ला भाषा को क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में सहर्ष शामिल किया गया है, तो फिर इसी राज्य के नागरिकों द्वारा बोली जाने वाली मगही और अंगिका से इतनी नफरत क्यों है? अगर बांग्ला और ओड़िया बोलने वाले लोग झारखंड के स्थाई निवासी हैं, तो भोजपुरी, मगही, अंगिका और मैथिली बोलने वाले लाखों लोग भी इसी राज्य के मूल बाशिंदे हैं, फिर उनके साथ यह दोहरी नीति और भेदभाव क्यों किया जा रहा है?

🛑 पांच मंत्रियों की कमेटी की अंतिम रिपोर्ट आने तक तुरंत रोकी जाए जेटेट परीक्षा की प्रक्रिया: राजद की सरकार से मांग

राजद प्रवक्ता कैलाश यादव ने वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि राज्य के एक बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र और आबादी में भोजपुरी, मगही, अंगिका और मैथिली भाषाएं दैनिक जीवन और संवाद का मुख्य हिस्सा हैं। ऐसे में जब पांच वरिष्ठ मंत्रियों की उच्च स्तरीय कमेटी इस अत्यंत महत्वपूर्ण और विवादित मुद्दे पर लगातार समीक्षा बैठकें कर रही है, तो सरकार को बड़प्पन दिखाते हुए इसकी अंतिम रिपोर्ट आने तक वर्तमान में चल रही जेटेट (JTET) परीक्षा और आवेदन की पूरी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से स्थगित या होल्ड कर देना चाहिए। ऐसा करने से राज्य के किसी भी योग्य युवा के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होगा और कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर एक सर्वमान्य, न्यायसंगत और विवादमुक्त नियमावली लागू की जा सकेगी।

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