MP New Transfer Policy: मध्य प्रदेश में कर्मचारियों के तबादलों से हटेगी रोक! आज मोहन यादव कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला संभव
भोपाल: मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए आज का दिन एक बड़ी खुशखबरी लेकर आ सकता है। राज्य में लंबे समय से अधिकारी-कर्मचारियों के तबादलों पर लगी रोक को आखिरकार हटाया जा सकता है। रोक हटते ही प्रदेश में धड़ाधड़ ऑनलाइन ट्रांसफर (Online Transfer) का दौर शुरू हो जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में एक महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक के एजेंडे में सरकारी सेवा के कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों पर लगी रोक को हटाना सबसे ऊपर शामिल है, जिस पर आज बड़ा ऐलान होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
📋 कैबिनेट में पेश होगा ‘तबादला नीति-2026’ का ड्राफ्ट: सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने तैयार की नई गाइडलाइंस
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को आयोजित होने जा रही इस कैबिनेट बैठक में नई ‘तबादला नीति-2026’ को लागू करने का आधिकारिक प्रस्ताव रखा जा सकता है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस नई नीति का पूरा ड्राफ्ट पहले ही तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय (CMO) को समीक्षा के लिए भेज दिया था। अगर आज कैबिनेट इस दूरगामी प्रस्ताव को हरी झंडी दे देती है, तो पिछले कई महीनों से सुस्त पड़ी तबादला प्रक्रिया फिर से जीवित हो उठेगी। इसके साथ ही राज्य में पारदर्शी तरीके से नई ट्रांसफर पॉलिसी लागू होने का रास्ता भी पूरी तरह साफ हो जाएगा।
🔄 दो अलग-अलग स्तरों पर किए जाएंगे अधिकारियों के ट्रांसफर: स्वैच्छिक और प्रशासनिक आधार पर तैयार होगी सूची
मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश के शासकीय सेवक कर्मचारी-अधिकारियों के ट्रांसफर मुख्य रूप से दो स्तरों पर निर्धारित करती है। पहले स्तर के अंतर्गत उन अधिकारियों का तबादला किया जाता है जो लंबे समय से (आमतौर पर 3 साल से अधिक) एक ही सीट या स्थान पर जमे हुए हैं। जबकि दूसरे स्तर में प्रशासनिक फेरबदल के तहत वे अधिकारी शामिल होते हैं जिनकी कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहते हैं या जिनकी प्रशासनिक शिकायतें मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और विभाग में सामने आती रहती हैं। इसके अलावा, एक बड़ा वर्ग उन कर्मचारियों का भी होता है जो गंभीर बीमारी, पारिवारिक परिस्थितियों या पारस्परिक (म्यूचुअल) आधार पर स्वैच्छिक तबादला कराने के लिए स्वयं आवेदन देते हैं।
💻 अब पूरी तरह ‘ऑनलाइन’ होगी ट्रांसफर की प्रक्रिया: प्रभारी मंत्रियों को जिले के भीतर और विभागीय मंत्रियों को राज्य स्तर के अधिकार
आपको बता दें कि राज्य में अब तबादलों की पूरी प्रक्रिया को भ्रष्टाचार मुक्त, अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए पूरी तरह से ऑनलाइन आवेदन व्यवस्था लागू की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, नई नीति में अधिकारों का विकेंद्रीकरण किया गया है। विभागीय मंत्री को अपने विभाग के अंतर्गत एक जिले से दूसरे जिले में अधिकारियों का तबादला करने की अनुमति रहेगी। वहीं, जिलों के प्रभारी मंत्रियों को केवल जिले की सीमा के भीतर ही श्रेणी-3 और श्रेणी-4 के कर्मचारियों के तबादले करने का सर्वाधिकार दिया जाएगा।
📈 इस बार भी लागू हो सकता है स्लैब सिस्टम: पिछले वर्ष 1 मई से खुले थे ट्रांसफर, 2 से 3 प्रतिशत तक बढ़ा था दायरा
प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार, कुछ विशेष और संवेदनशील मामलों में ट्रांसफर के आवेदन पहले संबंधित विभाग के प्रमुखों (एचओडी) के पास स्क्रूटनी के लिए जाएंगे और फिर वहां से नस्ती विभागीय मंत्री या प्रभारी मंत्री के समक्ष अंतिम निर्णय के लिए प्रस्तुत की जाएगी। गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी राज्य सरकार ने 1 मई से तबादले शुरू किए थे, जिसमें प्रशासनिक सुगमता के लिए पहली बार चार अलग-अलग स्लैब बनाए गए थे। पिछले साल कुल कैडर स्ट्रेंथ के मुकाबले तबादलों का दायरा 2 से 3 प्रतिशत तक बढ़ाया गया था, उम्मीद है कि इस बार भी इसी फॉर्मूले के तहत सीमित संख्या में लेकिन जरूरी विभागों में बड़े बदलाव किए जाएंगे।
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