Twisha Sharma Case: ट्विशा शर्मा केस में ‘सिज़ोफ्रेनिया’ का एंगल; सामने आए भोपाल के मशहूर मनोचिकित्सक, जानें क्या कहा
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स क्षेत्र में हुई नोएडा निवासी ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का हाईप्रोफाइल मामला दिनों-दिन और पेचीदा होता जा रहा है। एक तरफ जहां भोपाल पुलिस इसे संदिग्ध आत्महत्या के कोण से देख रही है, वहीं दोनों परिवारों के बीच जारी तीखे आरोप-प्रत्यारोप ने केस को बेहद संवेदनशील बना दिया है। अब इस पूरे मामले में मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) और कथित सिज़ोफ्रेनिया बीमारी का एक नया एंगल सामने आया है। ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने दावा किया है कि ट्विशा लंबे समय से मानसिक तनाव, अत्यधिक एंग्जायटी और सिज़ोफ्रेनिया जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही थीं और उनका बाकायदा इलाज चल रहा था। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अंतिम मेडिकल निष्कर्ष विशेषज्ञों की विस्तृत फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही साफ होगा।
❌ मायके पक्ष ने नकारा मानसिक बीमारी का दावा: कहा—दहेज उत्पीड़न और प्रताड़ना को छुपाने के लिए गढ़ी जा रही है कहानी
इधर, ट्विशा शर्मा के मायके पक्ष और उनके भाइयों ने ससुराल पक्ष द्वारा लगाए गए इन मानसिक बीमारी के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इस पर तीखे सवाल उठाए हैं। पीड़ित परिवार का स्पष्ट कहना है कि यह मामला किसी मानसिक बीमारी का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर भारी दहेज उत्पीड़न, लगातार दी जा रही मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत (कथित हत्या) का है। परिवार ने आरोप लगाया है कि रसूखदार ससुराल वाले कानूनी कार्रवाई और अपनी गलती से बचने के लिए मृतका की छवि खराब कर रहे हैं। परिवार ने न्याय के लिए दोबारा पोस्टमार्टम और उच्च स्तरीय न्यायिक निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग को फिर से दोहराया है।
🩺 सामने आए भोपाल के मशहूर मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी: क्लिनिक आने की पुष्टि की, लेकिन प्राइवेसी का दिया हवाला
इस पूरे विवाद के बीच, जिस भोपाल के मनोचिकित्सक के पास ट्विशा के इलाज कराने का दावा किया जा रहा था, वे वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी अब खुद मीडिया के सामने आए हैं। डॉ. त्रिवेदी ने इस बात की पुष्टि की है कि ट्विशा शर्मा काउंसलिंग और परामर्श के लिए उनके क्लिनिक पहुंची थीं। हालांकि, उन्होंने एक डॉक्टर के नैतिक कर्तव्यों, मरीज की निजता और मेडिकल प्राइवेसी (Medical Privacy Laws) का कड़ाई से हवाला देते हुए ट्विशा के उपचार, उसकी मानसिक स्थिति के स्तर और दी जा रही दवाइयों से जुड़ी कोई भी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा करने से साफ इनकार कर दिया।
🧠 आखिर क्या है ‘सिज़ोफ्रेनिया’ (Schizophrenia) बीमारी? वरिष्ठ डॉक्टरों ने लक्षणों और इसके प्रभाव को लेकर दी जानकारी
इस हाईप्रोफाइल केस के बाद आम जनता के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर सिज़ोफ्रेनिया क्या होता है? देश के वरिष्ठ मनोचिकित्सकों के अनुसार, सिज़ोफ्रेनिया एक बेहद गंभीर और जटिल मानसिक विकार (Mental Disorder) है, जिसमें व्यक्ति की सोचने की क्षमता, उसका दैनिक व्यवहार और उसकी भावनाएं बुरी तरह प्रभावित होती हैं। इस बीमारी से पीड़ित मरीज को अक्सर मतिभ्रम (Hallucinations), अत्यधिक शक करना, अकारण डर लगना और ऐसी रहस्यमयी आवाजें सुनाई देना जैसी समस्याएं होती हैं, जो वास्तव में होती ही नहीं हैं। कई बार मरीज अपनी ही परछाई या अपने सबसे करीबी लोगों पर भी जान लेने का संदेह करने लगता है, जिससे उसका सामाजिक और पारिवारिक जीवन पूरी तरह बिखर जाता है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि सही समय पर काउंसलिंग और नियमित थेरेपी से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
👮 पुलिस और एसआईटी (SIT) कर रही है हर बिंदु की पड़ताल: मेडिकल फाइल्स की स्क्रूटनी के बाद ही साफ होगी अंतिम सच्चाई
फिलहाल, ट्विशा शर्मा डेथ मिस्ट्री मामले में गठित की गई विशेष जांच दल (SIT) और भोपाल पुलिस हर बारीक पहलू की गहराई से जांच कर रही है। ससुराल पक्ष द्वारा सौंपे गए ट्विशा के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मेडिकल पर्चों, क्लिनिक की फाइलों और दवाओं के दावों की भी कानूनी पड़ताल की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी तक किसी भी आधिकारिक जांच एजेंसी या डॉक्टरों के पैनल ने सिज़ोफ्रेनिया या मानसिक बीमारी को ट्विशा की मौत का सीधा कारण नहीं माना है। ऐसे में मौत की असली और अंतिम सच्चाई विसरा रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्यों और डॉक्टरों की अंतिम मेडिकल ओपिनियन के बाद ही अदालत के सामने आ सकेगी।
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