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Indri News: इंद्री के सरकारी स्कूल में शिक्षकों और हेडमास्टर के बीच तकरार; गेस्ट टीचरों ने लगाया प्रताड़ना का आरोप

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करनाल: इंद्री के राजकीय प्राथमिक पाठशाला गुढ़ा में स्टाफ के बीच चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। गेस्ट टीचर सीमा और मोनिका ने स्कूल के मुख्याध्यापक पर लंबे समय से प्रताड़ित करने तथा रेगुलर और गेस्ट अध्यापकों के बीच भेदभाव करने के आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन तक शिकायत पहुंच चुकी है। अध्यापिकाओं के अनुसार, बीती 2 अप्रैल को स्कूल परिसर में मुख्याध्यापक और अन्य अध्यापिकाओं की मौजूदगी में विवाद इतना बढ़ गया था कि मौके पर पुलिस की डायल-112 टीम को बुलाना पड़ा। आरोप है कि बहस और तनाव के दौरान गेस्ट टीचर सीमा की तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए इंद्री नागरिक अस्पताल ले जाया गया।

अध्यापिका सीमा ने आरोप लगाया कि मैं गेस्ट टीचर हूं। उन्हें विभागीय नियमों के विपरीत पांचवीं कक्षा पढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि उन्हें वाटिका कक्षा मिलनी चाहिए थी। उन्होंने स्कूल में कमरों की कमी और कार्य विभाजन को लेकर भी नाराजगी जताई। अध्यापिकाओं का कहना है कि मामले को लेकर उच्चधिकार्यो को शिकायत भी की  लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। मीडिया टीम जब स्कूल पहुंची तो वहां कुछ अलग ही स्थिति देखने को मिली। एक कक्षा में बच्चे मौजूद थे और दरवाजे अंदर से बंद थे। दरवाजा खुलवाने पर अंदर कोई अध्यापिका नहीं मिली। कुछ देर बाद अध्यापिका डिंपल सामने आईं और बताया कि वह जनगणना कार्य में व्यस्त थीं।

स्कूल के मुख्याध्यापक ईश्वर सिंह ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि कुछ अध्यापिकाएं विभागीय नियमों के अनुसार कार्य नहीं कर रही हैं। सीमा अध्यापिका को पांचवीं कक्षा पढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन वह वाटिका कक्षा की मांग कर रही हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल में केवल छह कमरे हैं और कुल 204 विद्यार्थी पढ़ते हैं। मुख्याध्यापक ने कहा कि विभाग के निर्देशों के अनुसार छात्र संख्या कम होने पर सरप्लस स्टाफ को अन्य जरूरतमंद स्कूलों में भेजने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, लेकिन कुछ अध्यापिकाएं वहां जाने को तैयार नहीं हैं।

खंड शिक्षा अधिकारी गुरनाम सिंह ने बताया कि यह मामला लंबे समय से चल रहा है और विभाग लगातार दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 450 से अधिक थी, जो अब घटकर 204 रह गई है। वर्तमान में छात्र संख्या के अनुसार लगभग सात अध्यापकों की आवश्यकता है, जबकि स्कूल में 16 शिक्षक कार्यरत हैं। विभाग द्वारा सरप्लस पॉलिसी के तहत स्टाफ समायोजन की प्रक्रिया जारी है।

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