Women Reservation Bill: महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल गिरा, विपक्ष ने कहा- ‘बीजेपी को चुकानी पड़ेगी इसकी कीमत’
लोकसभा में पेश किया गया 131वां संशोधन विधेयक दो-तिहाई बहुमत न जुटा पाने के कारण पारित नहीं हो सका, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराव की स्थिति बन गई है. इस बिल में संसद की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने और परिसीमन से जोड़ने का प्रावधान था, जिसे विपक्ष ने लोकतांत्रिक ढांचे में बदलाव की कोशिश बताया. इसके बाद प्रक्रिया शुरू हुई और विधेयक 54 वोटों से गिर गया. अब आइए जानते हैं इस पर किसने क्या कहा.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि नारी शक्ति के अपमान की यह बात यहां नहीं रुकेगी, दूर तक जाएगी. विपक्ष को महिलाओं का आक्रोश न सिर्फ 2029 लोकसभा चुनाव में, बल्कि हर स्तर, हर चुनाव और हर स्थान पर झेलना पड़ेगा.
अमित शाह ने विपक्ष पर साधा निशाना
अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल को कांग्रेस, TMC, DMK और समाजवादी पार्टी ने पारित नहीं होने दिया. महिलाओं को 33% आरक्षण देने के बिल को गिरा देना, उसका उत्साह मनाना और जयनाद करना सचमुच निंदनीय और कल्पना से परे है. अब देश की महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण, जो उनका अधिकार था, वह नहीं मिल पाएगा. कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने यह पहली बार नहीं किया, बल्कि बार-बार किया है. उनकी यह सोच न महिलाओं और न देश के हित में है.
देश के चुनावी ढांचे को बदलने की कोशिश
वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस विधेयक को ‘संविधान पर हमला’ बताते हुए कहा कि यह देश के चुनावी ढांचे को बदलने की कोशिश थी, जिसे विपक्ष ने मिलकर रोक दिया. उन्होंने कहा कि यह सीधे तौर पर महिला आरक्षण का मुद्दा नहीं था, बल्कि इसे परिसीमन और जनगणना से जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही थी.
महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन बिल गिरा
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, अगर सरकार बिना परिसीमन और जनगणना की शर्तों के सरल महिला आरक्षण बिल लाती, तो इसे आसानी से लागू किया जा सकता था. प्रियंका ने आगे कहा कि ये बिल जिस तरह से सरकार ने पेश किया, उस तरह से उसका पारित होना नामुमकिन था. उन्होंने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ा और पुरानी जनगणना से जोड़ा, जिस कारण से इसे पारित नहीं किया गया. इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि महिला आरक्षण बिल नहीं, बल्कि परिसीमन बिल गिरा है.
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, हमने अपना पक्ष साफ रखा है. हम महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, महिलाओं को आरक्षण मिले, उन्हें सुरक्षा मिले, उनका सम्मान बढ़े, लोकतंत्र में जो उनको स्थान मिलना चाहिए. समाजवादी पार्टी या विपक्ष ने महिला आरक्षण को लेकर विरोध नहीं किया. लेकिन उसके साथ ये जो महिलाओं के अधिकारों का हरण करना चाहते थे, विपक्ष ने ऐसी लक्ष्मण रेखा खींची कि वे उस लक्ष्मण रेखा के पार नहीं आ पाए.
नारी शक्ति वंदन अधिनियम बरकरार
समाजवादी पार्टी सांसद इकरा हसन ने कहा कि सत्ता पक्ष के लोग शायद जागरूक नहीं है क्योंकि महिला आरक्षण के विरोध में आज वोटिंग थी ही नहीं. जो 2023 का नारी शक्ति वंदन अधिनियम है वह आज भी बरकरार है, उसके संबंध में जो संशोधन ये लाए थे, जिसमें ये परिसीमन करना चाहते थे. वह विफल हुआ है. हम नहीं चाहते कि महिलाओं का नाम लेकर बीजेपी अपनी राजनीतिक रोटी सेके. अगर सरकार की नीयत सही है तो 543 सीटों पर ही 33% आरक्षण लागू करें.
‘इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी’
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस, INDI गठबंधन ने जिस तरह महिला आरक्षण बिल को गिराने का काम किया, वह देश की जनता, नारी शक्ति ने देखा और उनके चेहरे को भी देखा है. आने वाले दिनों में इन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी. वहीं बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, स्पष्ट है कि कांग्रेस पार्टी विशेषकर राहुल गांधी हर चीज का विरोध करते हैं. ये लोग नारी विकास, नारी वंदन और नारी प्रतिनिधित्व का विरोध करते हैं. देश की जनता और देश की माता-बहनें इन्हें माफ नहीं करेंगी.
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण के लिए लाया गया संविधान संशोधन विधेयक आज जिस तरह गिरा है और जिस तरह कांग्रेस ने देश को बांटने के अपने एजेंडे को एक बार फिर पुरजोर शब्दों में रखा. कांग्रेस का चाल, चरित्र और चेहरा बेनकाब हुआ है.
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