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Twisha Sharma Case: ‘थाने के पास घर, फिर भी पुलिस को क्यों नहीं बताया?’ ट्विशा के भाई का बड़ा आरोप; पीसी में भड़के वकील

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भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बहुचर्चित और हाईप्रोफाइल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में सोमवार को एक नया मोड़ सामने आया है। एमपी नगर के एक प्रतिष्ठित रेस्तरां में मृतका के पिता, भाई और अन्य करीबी स्वजनों ने एक संयुक्त पत्रकार वार्ता (प्रेस कॉन्फ्रेंस) की, जिसमें देश के कई वरिष्ठ पूर्व सैन्य अधिकारी भी परिवार को समर्थन देने शामिल हुए। मीडिया से बात करते हुए स्वजनों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपित पति समर्थ सिंह लगातार फरार है। पुलिस द्वारा उस पर महज इनाम घोषित करना या उसका पासपोर्ट निलंबित कर देना ही पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। स्वजनों ने मृतका के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम (री-पोस्टमॉर्टम) कराने की अपनी मांग को पुरजोर तरीके से दोहराया, ताकि सच्चाई सामने आ सके और वे जल्द से जल्द अपनी बेटी का अंतिम संस्कार कर सकें।

🎖️ सेवानिवृत्त मेजर जनरल श्याम श्रीवास्तव ने पुलिस को घेरा: बोले—मृतका का भाई खुद सेना में मेजर, फिर भी न्याय के लिए भटक रहा परिवार

इस पत्रकार वार्ता में विशेष रूप से शामिल हुए भारतीय सेना के सेवानिवृत्त मेजर जनरल श्याम श्रीवास्तव ने पुलिस प्रशासन और व्यवस्था पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यह कोई सामान्य मौत या आत्महत्या का सीधा मामला नहीं है, बल्कि पूरी कानून-व्यवस्था की स्थिति इस समय संदिग्ध और एकतरफा दिखाई दे रही है। उन्होंने इस बात पर गहरा दुख और आक्रोश जताया कि मृतका का सगा भाई खुद भारतीय सेना में देश की सेवा में ‘मेजर’ के पद पर तैनात है, इसके बावजूद अपनी बहन को न्याय दिलाने के लिए इस सैनिक परिवार को दर-दर भटकना पड़ रहा है क्योंकि आरोपी पक्ष बेहद रसूखदार और प्रभावशाली है। उन्होंने सवाल उठाया कि पोस्टमॉर्टम (Post-Mortem) की प्रक्रिया के समय फंदे की सामग्री को फॉरेंसिक या रासायनिक जांच के लिए तुरंत लैब क्यों नहीं भेजा गया? यह सीधे तौर पर भोपाल पुलिस की घोर लापरवाही या बेहद अनप्रोफेशनल कार्यशैली को दर्शाता है।

🏍️ थाने से महज 30 सेकंड की दूरी पर घर, फिर भी नहीं दी सूचना: एफआईआर में लगाए 3 दिन; पूर्व सैनिकों की ‘वर्दी वेलफेयर सोसाइटी’ निकालेगी बाइक रैली

मृतका के मेजर भाई ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के बाद पुलिस को पहला फोन उनके परिवार ने किया था, न कि ससुराल वालों ने। ससुराल पक्ष का यह दावा पूरी तरह झूठा है कि वे ट्विशा को बचाने की जल्दबाजी में अस्पताल भागे थे। सीसीटीवी फुटेज से साफ है कि घटना के समय सास सीढ़ियों पर बेहद सामान्य और सहज तरीके से आ-जा रही थी। घर से महज 30 सेकंड की दूरी पर पुलिस थाना होने के बावजूद उन्होंने पुलिस को समय पर सूचना क्यों नहीं दी? भाई ने यह भी आरोप लगाया कि जब उनका परिवार भोपाल पहुंचा, तो पुलिस ने रसूख के दबाव में एफआईआर (FIR) दर्ज करने में ही तीन दिन लगा दिए। इस बीच, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए थल सेना, नौसेना और वायुसेना के सेवानिवृत्त कर्मियों के संगठन ‘वर्दी वेलफेयर सोसाइटी’ ने बुधवार को एक विशाल बाइक रैली निकालने का ऐलान किया है। यह रैली शौर्य स्मारक से शुरू होकर सीएम हाउस, पुलिस मुख्यालय और राजभवन तक जाएगी, जहां मुख्यमंत्री, राज्यपाल और डीजीपी को सख्त कार्रवाई के लिए ज्ञापन सौंपे जाएंगे।

⚖️ प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवाल पर भड़के पूर्व जज के वकील: बड़ी बहू के तलाक के सवाल पर हुआ हंगामा, पार्सल सौंपने का दावा

यह हाईप्रोफाइल मामला उस वक्त और तूल पकड़ गया, जब आरोपी पूर्व जज गिरिबाला सिंह के वकील इनोश जॉर्ज कार्लो सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया के तीखे सवालों पर अचानक भड़क गए। पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि आखिर इस परिवार की बड़ी बहू का पहले तलाक क्यों हुआ था? तो वकील ने असहज होकर पलटवार किया, “क्या आपका तलाक नहीं हो सकता?” दरअसल, मीडिया और मृतका के मायके पक्ष का तर्क है कि यह सवाल इसलिए बेहद अहम है क्योंकि इस परिवार पर अपनी बहुओं को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप पहले से लग रहे हैं। दूसरी ओर, पूर्व जज के वकील ने यह भी दावा किया कि उन्होंने पुलिस को कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण सीलबंद पार्सल सौंपे हैं, जो इस केस की जांच की दिशा को पूरी तरह बदल सकते हैं।

💬 रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह का पलटवार, आरोपों को नकारा: कहा—न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा, मायके वाले बेटी की मौत पर साध रहे हित

दूसरी ओर, आरोपित रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने मंगलवार को अपने आवास पर कुछ पत्रकारों से बात की, जिसमें उन्होंने पहली बार सामने आकर मायके वालों पर बेहद गंभीर और भावनात्मक आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, “ट्विशा ग्लैमर की दुनिया और अपनी नौकरी से जो भी कमाती थी, उसका अधिकांश हिस्सा वह अपने माता-पिता को भेज देती थी। मायके वाले उसकी दुखद मौत का इस्तेमाल सिर्फ अपना आर्थिक और व्यक्तिगत हित साधने के लिए कर रहे हैं।” गिरिबाला सिंह ने साफ कहा कि उन्हें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। सरकार चाहे तो निष्पक्षता के लिए इस मामले की जांच किसी भी बड़ी केंद्रीय एजेंसी (जैसे सीबीआई) से करा ले, वे जांच का सामना करने को तैयार हैं।

👮 पुलिस का आधिकारिक बयान: एसआईटी (SIT) कर रही है मामले की जांच, फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी

इस पूरे मामले पर पुलिस प्रशासन ने भी अपना रुख स्पष्ट किया है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया, “इस हाई-प्रोफाइल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है जो पूरे मामले की वैज्ञानिक और तकनीकी पहलुओं से जांच में लगी है। मुख्य फरार आरोपी की तलाश में पुलिस की अलग-अलग टीमें कई राज्यों और संभावित स्थानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। कानून के मुताबिक निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।”

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