Ludhiana News: जनगणना ड्यूटी से डरे प्राइवेट स्कूल के शिक्षक, बोले—जबरदस्ती की तो दे देंगे नौकरी से इस्तीफा
लुधियाना: जिला प्रशासन की ओर से लगाई जा रही जनगणना (सैंसस) ड्यूटी इस समय प्राइवेट स्कूलों के अध्यापकों और स्कूल मैनेजमैंट के लिए एक बड़ी मुसीबत बनकर खड़ी हो गई है। जमीनी हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि कई नामी प्राइवेट स्कूलों के अध्यापकों ने मैनेजमैंट को लिखित में अल्टीमेटम दे दिया है कि अगर उनसे जबरन जनगणना की ड्यूटी कराई गई, तो वे प्राइवेट स्कूल की सम्मानजनक नौकरी ही छोड़ देंगे और घर बैठना पसंद करेंगे, लेकिन इस प्रताड़ना वाली ड्यूटी पर किसी भी कीमत पर नहीं जाएंगे। इस पूरे गंभीर मामले में अध्यापकों के परिवारों और उनके परिजनों में भी प्रशासन के खिलाफ भारी रोष देखा जा रहा है।
⚖️ ‘आगे कुआं, पीछे खाई’ में फंसी मैनेजमेंट: नाम न भेजने पर प्रशासन दे रहा है एफआईआर (FIR) की सीधी धमकी
एक तरफ जहां शिक्षक इस ड्यूटी पर जाने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं, वहीं दूसरी तरफ स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से उन पर लगातार भारी दबाव बनाया जा रहा है और जल्द से जल्द अध्यापकों के नाम भेजने के लिए कहा जा रहा है। स्कूलों का सीधा आरोप है कि जब वे सूची भेजते हैं और संबंधित अध्यापक व्यक्तिगत कारणों से ड्यूटी पर जाने से साफ मना करते हैं, तो प्रशासन और जनगणना विभाग की तरफ से सीधे स्कूलों पर एफ.आई.आर. दर्ज करने और मान्यता रद्द करने जैसी कड़ी धमकियां दी जा रही हैं। स्कूल मैनेजमैंट का कहना है कि उनके सामने इस समय ‘आगे कुआं, पीछे खाई’ जैसी विकट स्थिति बन गई है।
❓ बेरोजगार युवाओं को मौका क्यों नहीं?: अध्यापकों ने उठाए गंभीर सवाल, डबल ड्यूटी और खराब रिजल्ट का सता रहा डर
इस जबरन ड्यूटी का पुरजोर विरोध कर रहे अध्यापकों का कहना है कि सरकार को इस बड़े काम के लिए देश के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को मौका देना चाहिए, जिससे उन्हें अस्थाई रोजगार भी मिलेगा और वे इस काम को ज्यादा बेहतर ढंग से कर पाएंगे। अध्यापकों ने तीखा सवाल उठाया, “हम पहले से ही स्कूलों में अपनी पूरी ड्यूटी कर रहे हैं, ऐसे में हम एक साथ डबल-डबल ड्यूटी कैसे संभाल सकते हैं? अगर हम दिनभर जनगणना के काम में गलियों में घूमते रहे, तो स्कूलों में हमारी कक्षाओं में बच्चों को कौन पढ़ाएगा?” शिक्षकों का तर्क है कि इससे स्कूलों के बोर्ड रिजल्ट खराब होंगे और विद्यार्थियों की पढ़ाई का भी भारी नुकसान होगा।
📉 चरमरा गया स्कूलों का पूरा ढांचा: 85 में से 70 शिक्षकों की लगा दी ड्यूटी, शाम को भी काम करने का दबाव
इसके अलावा, कई महिला अध्यापकों का कहना है कि उन्हें शाम के समय भी फील्ड में जाकर ड्यूटी करने के लिए मौखिक आदेश दिए जा रहे हैं, जो उनके लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है क्योंकि हर किसी के अपने पारिवारिक प्लान और सामाजिक जिम्मेदारियां होती हैं। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा प्राइवेट स्कूलों में आकर जिस मनमाने ढंग से ड्यूटियां बांटी जा रही हैं, उससे स्कूलों का पूरा अकादमिक ढांचा चरमरा गया है। शहर के एक स्कूल का उदाहरण सामने आया है जहां करीब 150 टीचर्स का स्टाफ है, वहां एक साथ बड़ी संख्या में ड्यूटियां लगा दी गईं। वहीं एक अन्य स्कूल का मामला सामने आया है जिसमें कुल 85 टीचर्स का स्टाफ है और वहां 85 में से 70 अध्यापकों की ड्यूटी अकेले इस जनगणना कार्य में लगा दी गई है, जिससे स्कूल पूरी तरह खाली हो चुके हैं।
📝 मई टेस्ट के बीच सिलेबस पिछड़ने का संकट: चिंतित प्रबंधकों का सवाल—पढ़ाई खराब हुई तो अभिभावकों को क्या देंगे जवाब?
निजी स्कूलों के प्रबंधकों का दर्द है कि महज 15 अध्यापकों के भरोसे वे पूरे स्कूल के हजारों बच्चों को कैसे पढ़ाएं? गौरतलब है कि प्राइवेट स्कूलों में इस समय विद्यार्थियों के बेहद जरूरी ‘मई टेस्ट’ चल रहे हैं। ऐसे में मुख्य अध्यापकों की ड्यूटियां लग जाने से स्कूलों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है कि वे बच्चों के एग्जाम कैसे लें और टेस्ट रूम में ड्यूटियां किसकी लगाएं? स्कूलों का कहना है कि इस प्रशासनिक अव्यवस्था से बच्चों का सिलेबस पूरी तरह से पिछड़ जाएगा, जिससे आने वाले समय में बोर्ड और अन्य वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी बुरी तरह प्रभावित होगी। स्कूल प्रबंधकों ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यदि बच्चों की पढ़ाई खराब होती है, तो वे मोटी फीस देने वाले पेरेंट्स को क्या जवाब देंगे? स्कूल इस समय प्रशासन के कड़े प्रेशर और कारण बताओ नोटिसों के बीच बुरी तरह पिस रहे हैं।
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