ATS Operation: संदिग्ध आतंकियों का बड़ा खुलासा; निशाने पर थे 5 हिंदू नेता, ग्रेनेड हमले से दहशत फैलाने की थी साजिश
UP Crime News: नोएडा से गिरफ्तार किए गए दो संदिग्ध आतंकियों से पूछताछ में एक बड़े आतंकी साजिश का खुलासा हुआ है. एटीएस की जांच में सामने आया है कि पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आईएसआई से जुड़े हैंडलर्स भारत में हिंदूवादी नेताओं की टारगेट किलिंग और ग्रेनेड हमलों की साजिश रच रहे थे. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बागपत निवासी तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्लाह अली खान और दिल्ली के ओल्ड सीमापुरी इलाके निवासी समीर खान के रूप में हुई है. दोनों को 23 अप्रैल को एटीएस ने नोएडा से गिरफ्तार किया गया था.
एटीएस की पूछताछ में खुलासा हुआ कि पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आईएसआई के संपर्क में रहने वाले मेजर हमीद, मेजर इकबाल, मेजर अनवर, मोहम्मद हमाद बरकाती और आबिद जट जैसे हैंडलर्स इन आरोपियों को निर्देश दे रहे थे. जांच एजेंसियों के अनुसार, इन दोनों को पांच हिंदूवादी नेताओं दक्ष चौधरी, अभिषेक ठाकुर, पिंकी चौधरी, युद्धि राणा और गौरव राजपूत की हत्या का टास्क सौंपा गया था. साजिश के तहत इन नेताओं की गला रेतकर हत्या करनी थी और उनके घरों पर ग्रेनेड फेंककर दहशत फैलानी थी.
हैंडलर्स ने किए थे 3 लाख रुपए देने का वादा
एटीएस के अनुसार इस पूरी वारदात के लिए आरोपियों को तीन लाख रुपये देने का वादा हैंडलर्स ने किए थे. इसमें 50 हजार रुपये एडवांस और ढाई लाख रुपये वारदात को अंजाम देने के बाद देने की बात कही गई थी. साथ ही दोनों को पासपोर्ट बनवाकर दुबई भेजने और वहीं बसाने का लालच भी दिया गया था, ताकि भारतीय एजेंसियां उन तक न पहुंच सकें.
कॉन्फ्रेंस कॉल कर दी थी धमकी
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने सोशल मीडिया और व्हाट्सएप कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए एक्स-मुस्लिम और इस्लाम छोड़ चुके इमरोज आलम, अंजली आर्या, समीर और सलीम वास्तिक को धमकी दी थी. इस कॉन्फ्रेंस कॉल शहजाद भट्टी भी शामिल था. संबंधित कॉल रिकॉर्डिंग्स भी एटीएस को मिली है, जिसकी गहराई से जांच की जा रही है.
रिमांड पर भेजे गए दोनों संदिग्ध
एनआईए की विशेष अदालत में एटीएस ने आरोपियों की रिमांड मांगी थी. बृहस्पतिवार को न्यायाधीश नीतू पाठक ने दोनों आरोपियों को 6 दिन की कस्टडी रिमांड मंजूर कर दी. 1मई 11 बजे से 6 मई शाम 6 बजे तक एटीएस इन्हें हिरासत में लेकर गहन पूछताछ करेगी. इससे साजिश की पूरी श्रृंखला, अन्य सहयोगियों और हथियारों के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है.
यह साजिश सोशल मीडिया खासकर इंस्टाग्राम और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए युवाओं को रैडिकलाइज करने का था. पाकिस्तानी हैंडलर्स भारतीय युवाओं को पैसे, हथियार और विदेश भागने का लालच देकर आतंकी गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश कर रहे थे.
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.