Railway News: एक दशक बाद भी अधूरी है स्टेशन की सेकेंड एंट्री! टिकट काउंटर और पार्किंग के लिए भटक रहे यात्री
कोरबा: रेलवे स्टेशन के सेकेंड एंट्री में सुविधाओं का विस्तार 1 दशक बाद भी अधूरा है. रेलवे ने शहर में लगभग 10 साल पहले सेकंड एंट्री में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की पहल की थी. तब दावा किया था कि यहां वह सभी सुविधाएं मिलेंगी, जो रेलवे के किसी प्लेटफार्म पर मिलती हैं. लेकिन अब एक दशक बाद भी यहां सुविधाओं का विस्तार नहीं हो सका है. पार्किंग से लेकर पीने का पानी और टिकट काउंटर तक के लिए लोगों को यहां परेशान होना पड़ता है. फाटक बंद होने की स्थिति में लोग दूसरी तरफ से घूम कर रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार तक पहुंचाते हैं. जिसके लिए उन्हें 5 किलोमीटर का अतिरिक्त फेरा लगाना पड़ता है.
तीन काउंटर वाला टिकटघर है वीरान
कोरबा एक ऐसा शहर है, जिसके बीचों-बीच से रेल लाइन गुजरती है. जहां से पावर प्लांट को कोयले की सप्लाई की जाती है. जब विकास हुआ तो रेल पटरी के दोनों तरफ घनी आबादी वाला शहर बस चुका है. एक तरफ से दूसरी तरफ जाने के लिए लोग रेल फाटक पार करते हैं, शहर के सीएसईबी, टीपी नगर, शारदा विहार और सीतामढ़ी के इमलीडुग्गू फाटक तक पूरा शहर फटकों में बांटा हुआ है. शहर के पश्चिम की तरफ रेलवे स्टेशन का मुख्य प्रवेश द्वार है. पूर्व की तरफ भी आबादी बसती है, आधा शहर और उपनगरीय इलाके दूसरी तरफ है. इन्हें भी फाटक पार कर मुख्य प्रवेश द्वार तक पहुंचाना पड़ता है
पूर्व की तरफ सेकंड एंट्री का निर्माण किया गया था, लेकिन वर्तमान में यहां पीने के पानी, वाशरूम, टायलेट-बॉथ रूम की सुविधा के साथ ही व्यवस्थित अनारक्षित टिकट घर की व्यवस्था नहीं है. यात्रियों को टिकट के लिए मुख्य द्वार पर न जाना पड़े, इसलिए 3 काउंटर वाला टिकट घर तो बनाया था. टिकट घर के सामने फ्लोरिंग की थी, ताकि बारिश के समय कीचड़ से लोगों को परेशानी न हो, जमीन विवाद के कारण अब वहां केवल एक टिकट घर ही नजर आता है. वह भी ज्यादातर समय बंद ही रहता है. बाकी सुविधाएं भी बंद सी हो गई हैं पीने के पानी की नलें, टाइल्ट सालों पहले ही चोरी हो गए थे. अब वहां सुविधा के नाम पर यात्रियों को उस रास्ते स्टेशन पहुंचने का सिर्फ मार्ग बचा रह गया है.
कोयला लोडिंग के कारण प्रदूषण की मार
वर्षों पहले जब सेकेंड एंट्री खुला तब यहां शुरू में कुछ सुविधा थी. लेकिन इसके कुछ समय बाद ही एसईसीएल प्रबंधन ने कोल डिस्पैच के लिए कोल साइडिंग शुरू कर दी. सेकेंड एंट्री के बगल से गुजरे बायपास सड़क की मरम्मत नहीं होने से वहां की स्थिति भी काफी जर्जर हो चुकी है. उस पर हमेशा भारी वाहन कोयला लेकर दौड़ते हैं, जिससे पहले से परेशान यात्रियों को साइडिंग खुलने के बाद दोहरी परेशानी होती है.
जमीन का भी विवाद
सेकेंड एंट्री शहर की आधी से अधिक आबादी के लोगों को स्टेशन आने-जाने में होने वाली परेशानियों को कम करने के उद्देश्य से बनाया था. लेकिन अब सुविधाएं बढ़ाने की ओर रेल प्रबंधन का ध्यान नहीं है. एक जानकारी यह भी है कि जिस स्थान पर सेकंड एंट्री का निर्माण हुआ है, वह भूमि रेलवे की नहीं है इसे एसईसीएल द्वारा लीज पर प्रदान किया गया है. जमीन का विवाद भी है, जिसके कारण यहां यात्री सुविधाओं को लेकर विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं.
घूम कर जाना पड़ता है मुख्य प्रवेश द्वार
स्थानीय निवासी मनोज मिश्रा का कहना है कि रेलवे स्टेशन के सेकंड एंट्री में किसी तरह की सुविधा नहीं है. इससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है. सेकंड एंट्री में सुविधाओं का विस्तार होता है तो वह यात्रियों के लिए काफी सुविधाजनक होगा. पार्किंग से लेकर हर तरह की सुविधा लोगों को मिलने लगेगी तो काफी राहत मिलेगी.
इसी तरह शहर वासी अनीश प्रसाद कहते हैं कि सेकंड एंट्री में पहले टिकट घर था, उसे कुछ समय के लिए खोला भी गया था. लेकिन अभी तो यह बंद है. फाटक बंद रहता है तो घूमकर 5 किलोमीटर तक जाना पड़ता है. इससे काफी परेशानी होती है.
सेकेंड एंट्री की करेंगे समीक्षा
हाल ही में बिलासपुर रेल मंडल के डीआरएम राकेश रंजन कोरबा के प्रवास पर थे. सेकंड एंट्री के विस्तार और यहां की बदहाल व्यवस्था के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि सेकंड एंट्री में सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा. स्थानीय अधिकारियों से जानकारी लेकर इसकी समीक्षा करेंगे.
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